डायरिया से रहें सावधान

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डॉ. शशि कुमार बताते हैं “डायरिया बच्चों में बहुत ज्यादा फैलने वाला रोग है। लेकिन इस बीमारी से बड़े व्यक्तियों भी अछूते नहीं है। जब कोई व्यक्ति मौसम के अनुसार खान-पान का ख्याल नहीं रख्ाता है तो इसका बुरा असर उसके पाचन कि्रया पर पड़ता है उस व्यक्ति को डायरिया होने की सम्भावना बढ़ जाती है।” गर्मी, बरसात के मौसम में सड़क के किनारे के खुले जूस या बाहर का खाना-पीना कई मायने में आपके लिए अच्छा नहीं होता है। दूषित आहार व पानी के सेवन से होने वाली बीमारियां हैं टायफायड, जांडिस, डायरिया और यहां तक कि अधिक समय तक दूषित आहार या पानी के सेवन से आपकी किडनी भी खराब हो सकती है।

डायरिया के प्रकार

=क्रोनिक, एक्यूट, गैस्टरो, और डिसेंट्री डायरिया 

डायरिया के कारण

=पेट के कीड़ों या बैक्टेरिया के संक्रमण से।

=वायरल संक्रमण के कारण।

=आस-पास सफाई ठीक से न होने से।

=शरीर में पानी की कमी होने से।

=किसी दवाई के रिएक्शन से।

=पाचन शक्ति कमजोर होने से।

=घंटों बाहर रहना बाहर का खाना-पीना।

=कभी-कभी ज्यादा तैराकी करने से भी डायरिया हो सकता है।

डायरिया के लक्षण

डॉ. शशि बताते हैं “आमतौर पर डायरिया 4 से सात दिन लेता है ठीक होने में अगर यह इससे ज्यादा समय तक रहे तो ये क्रॉनिक डायरिया कहलाता है और इसका इलाज समय पर न होने से ये खतरनाक भी हो सकता है लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरत कर ठीक भी किया जा सकता है। इसके लिए डायरिया के लक्षण जानना काफी जरूरी है।”

=पेट में दर्द होना।

=जल्दी-जल्दी दस्त आना।

=पेट में मरोड़ पड़ना।

=उल्टी आना।

=बुखार होना।

=कमजोरी महसूस होना।

डायरिया का इलाज

डॉ. शशि कुमार बताते “डायरिया को बच्चों की मौत की बड़ी वजह माना जाता है। विश्व में सात लाख साठ हजार बच्चे (पांच साल से कम उम्र) डायरिया से मरते हैं।” ठंड से बचाव न होने पर दस्त शुरू हो जाते हैं। यदि ठंड का इंतजाम नहीं किया गया तो यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है। लेकिन सही समय पर इसका इलाज करने से इससे आसानी से निजात भी पाई जा सकती है। दस्त लगने पर एक ओर जहां शरीर में से पानी और महत्वपूर्ण तत्व बाहर निकल जाते हैं वहीं कुछ न खाने और पीने की वजह से शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। 

डायरिया के उपचार में आहार का बड़ा महत्व 

=डायरिया के रोगी को केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट का मिश्रण जिसे ब्राट कहते हैं, इसके इस्तेमाल से राहत मिलती है।

=केले और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त को बांधने में सहायता करते हैं।

=सेब और केले में मौजूद पेक्टिन न केवल दस्त की मात्रा कम करता है बल्कि डायरिया को रोकने में भी प्रभावशाली भूमिका निभाता है।

=पर्याप्त मात्रा में तरल और अन्य पोषक पदार्थ लेना आवश्यक है।

रिपोर्टर - नाज़नीन

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