विरोध के बावजूद चाइनीज माल से पटे बाजार 

विरोध के बावजूद चाइनीज माल से पटे बाजार chinese products

लखनऊ। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से सोशल साइट्स पर चाइनीज माल न खरीदने की मुहिम सी छिड़ गई है। इस समय कई मैसेज वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोगों को बताया जाता है कि चाइनीज माल खरीदने से क्या-क्या नुकसान हो रहे हैं। दिपावाली की चाइनीज सप्लाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब बिक्री में किसी भी तरह की बाधा से सिर्फ स्थानीय व्यापारियों का नुकसान होगा। इसलिए कारोबरी चीनी माल को छोड़ने को राजी नहीं हैं। खासतौर पर दीपावली में झालर इसमें खास हैं। भारतीय झालर बाजार में हैं ही नहीं, ऐसे में अगर चीन की लाइटिंग छोड़ी गई तो दीपावली अंधेरे में गुजरने तक की आशंका है।

हर वर्ग का आदमी खरीदता है चाइनीज माल

वैसे तो देश में हर समय चाइनीज माल की डिमांड रहती है पर दशहरा और दिपावाली में इन मालों की मांग और बढ़ जाती है। इसका प्रमुख कारण है चाइनीज माल भारत के माल की तुलना में सस्ते होते हैं और इनको खरीदना आम आदमी के बस में होता है, जबकि भारतीय माल की कीमत चाइनीज माल की अपेक्षा बहुत ज्यादा होती है। अमीनाबाद में चाइनीज माल की दुकान लगाने वाले राकेश वर्मा बताते हैं, “चाइनीज माल की कीमत कम है, इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। सालभर चाइनीज माल का क्रेज बना रहता है पर दिपावाली में चाइनीज झालर, मोमबत्ती, लाइट की मांग ज्यादा होती है।” वहीं नाका पर चाइनीज माल की दुकान लगाने वाले अजय यादव बताते हैं, “हमारी दुकान पर हर वर्ग का आदमी चाइनीज माल खरीदने आता है। वर्षभर में चाइनीज माल की बिक्री होती है। लोगों को यह सस्ता पड़ता है और हमे भी अच्छा मुनाफा होता है। चाइनीज माल फैन्सी होने के नाते लोगों को ज्यादा पसंद आता है।”

चाइनीज माल के बहिष्कार की अफवाह से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। सरकार ने चाइनीज सामानों पर कोई रोक नहीं लगाई है। दिपावाली का सामान 2-3 महीने पहले ही आ चुका है।
अमरनाथ मिश्रा, लखनऊ व्यापार मण्डल अध्यक्ष

पहले भी हो चुकी हैं चाइनीज माल के बहिष्कार की मांग

जब भी सरहद पर तनाव बढ़ता है तो अक्सर देश में चाइनीज मालों के बहिष्कार की मांग उठने लगती है, लेकिन जैसे-जैसे सरहद पर तनाव कम पड़ता है। वैसे ही चाइनीज मालों के बहिष्कार की मांग भी खत्म हो जाती है।

अभी जल्द ही लगा था चाइनीज मांझे पर बैन

दिल्ली में चाइनीज मांझे से बच्ची की गर्दन कटने से हुई मौत और एनएच-24 पर एक बच्चे के गंभीर रूप से घायल होने के बाद नोएडा में चाइनीज मांझे पर रोक लगा दी गई। इस मांझे में धार रहती है और इनमें प्लास्टिक, कांच और नायलॉन का इस्तेमाल होता है। इनकी वजह से अक्सर बाइक सवार चोटिल होते हैं।

बिना चाइनीज माल के दिपावाली होगी सूनी

अगर चाइनीज माल का पूर्णरूप से बहिष्कार कर दिया जाता है तो वो लोग जो दिपावाली में चाइनीज झालरों और लाइटों से घर को सजा लेते हैं शायद उनकी दिपावाली फीकी पड़ जाएगी। क्योंकि भारतीय झालर और लाइटों की कीमत इतनी ज्यादा है कि हर आदमी के लिए इनको खरीदना सम्भव नहीं है।

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