लिखित सफाई देकर चीन ने कहा, बांध बनाने से ब्रह्पुत्र पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क

लिखित सफाई देकर चीन ने कहा, बांध बनाने से ब्रह्पुत्र पर नहीं पड़ेगा कोई फर्कब्रह्मपुत्र नदी

बीजिंग (भाषा)। चीन ने हाल ही में ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी का पानी रोक दिया था। भारत में इसे पाकिस्तान का समर्थन करने के चीन एक तरीके के तौर पर भी देखा जा रहा था। हालांकि चीन ने इन आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए एक लिखित स्पष्टीकरण जारी किया है।

चीन ने कहा कि चीन ने कहा कि सहायक नदी का पानी रोके जाने से निचले इलाकों पर कोई विपरीत असर नहीं होगा।

परियोजना की जलाशय क्षमता ब्रह्मपुत्र के औसत वार्षिक प्रवाह का 0.02 फीसदी है। निचले इलाकों में इसके प्रवाह पर विपरीत असर नहीं हो सकता।
चीनी विदेश मंत्रालय

ब्रह्मपुत्र की सहायक शियाबुकु नदी पर लालहो बांध परियोजना को तिब्बत में खाद्य सुरक्षा और बाढ़ सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सहायक नदी पूरी तरह चीन में स्थित है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने बांध को लेकर भारत की चिंताओं पर लिखित जवाब में कहा, "परियोजना की जलाशय क्षमता ब्रह्मपुत्र के औसत वार्षिक प्रवाह का 0.02 फीसदी है। निचले इलाकों में इसके प्रवाह पर विपरीत असर नहीं हो सकता।" ब्रह्मपुत्र तिब्बत से अरुणाचल प्रदेश, असम और फिर बांग्लादेश में बहती है।

चीन ने एक अक्तूबर को घोषणा की थी कि वह अपनी 'सबसे महंगी' बांध परियोजना के लिए तिब्बत में शियाबुकु नदी का जल प्रवाह रोकने जा रहा है, जो कि ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है।

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