सूखे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चेताया

सूखे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चेतायाउच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को चेतावनी दी कि इस बार देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति से निबटने के लिए पिछले साल जैसी ‘गलतियां’ नहीं दोहराए।

नई दिल्ली (भाषा)। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को चेतावनी दी कि इस बार देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति से निबटने के लिए पिछले साल जैसी ‘गलतियां' नहीं दोहराए। न्यायालय ने कहा कि जब घर में आग लगी हो तो उस वक्त कुंआ नहीं खोदिए।'

'जब घर में आग लगी हो तो उस वक्त कुंआ मत खोदिए'

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने सरकार से कहा कि इस साल देश के चुनिन्दा हिस्सों में सूखे की स्थिति से निबटने के लिए राहत उपायों के साथ उसे तैयार रहना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘हम आपके नजरिए से चिंतित हैं, आपको अपनी सोच बदलनी चाहिए। समय से सूखाग्रस्त होने की घोषणा नहीं करने वाली पिछले साल की गलती अब नहीं दोहराएं। जब घर में आग लगी हो तो उस वक्त कुंआ मत खोदिए।''

पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब उसका ध्यान देश के अनेक जिलों में कम बारिश होने के तथ्य की ओर आकर्षित किया गया और कहा गया कि पिछले साल जैसी स्थिति इस बार फिर पैदा हो सकती है जो सरकार को अचानक ही परेशानी में डाल सकती है।

अतिरिक्त सालिसीटर ने सरकार का बचाव किया

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा कि यह कहना गलत है कि केंद्र सूखे जैसी स्थिति से निबट नहीं रहा है। न्यायालय के निर्देशानुसार ही सारी प्रक्रिया चल रही है। हम विशेषज्ञों और अन्य संस्थाओं की सिफारिशों तथा सुझावों के मुताबिक सूखे से संबंधित मैनुअल में सुधार कर रहे हैं। गैर सरकारी संगठन स्वराज अभियाजन के वकील प्रशांत भूषण ने भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश के कई जिलों में कम बारिश हुई है।

इस पर पीठ ने नरसिम्हा से कहा कि अब तक तो केंद्र को देश में हुई बारिश के विवरण का अनुमान मिल गया होगा। पीठ ने जानना चाहा कि क्या उसने इस संबंध में प्रभावित राज्यों के लिए कोई परामर्श जारी किया है। पीठ ने कहा कि उसे उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार बिहार में 12, उप्र में 32, पंजाब में 11 और गुजरात में 13 में सामान्य से कम बारिश हुई है।

राज्यों के लिए परामर्श जारी किया जा चुका : नरसिम्हा

नरसिम्हा ने कहा कि इन राज्यों के लिए परामर्श जारी किया जा चुका है जिसमें सामने आ रही नई स्थिति से उन्हें अवगत कराया गया है। पीठ ने कहा कि कि हम चाहते हैं कि आप भविष्य के लिए तैयार रहें। पुरानी गलतियां दोहराई नहीं जाएं। न्यायालय ने कहा कि हालांकि स्थिति पिछले साल जैसी खराब नहीं है लेकिन आपको स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने न्यायालय को सूचित किया कि 35 लाख हेक्टेयर से अधिक खेतिहर भूमि में बुवाई हो चुकी है और केंद्र सरकार राज्यों को हर तरह की तकनीनी सहायता उपलब्ध करा रही है। शीर्ष अदालत पिछले साल सूखे से प्रभावित 12 राज्यों के किसानों की दयनीय स्थिति को लेकर गैर सरकारी संगठन स्वराज अभियान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।



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