जेटली ने कम व नकारात्मक ब्याज दरों के जोखिम को लेकर किया आगाह

जेटली ने कम व नकारात्मक ब्याज दरों के जोखिम को लेकर किया आगाहजेटली ने कम व नकारात्मक ब्याज दरों के जोखिम को लेकर किया आगाह

वाशिंगटन (भाषा)। भारत ने बैंकिंग प्रणाली में कम और नकारात्मक ब्याज दरों और उल्लेखनीय संख्या में रिण के खराब होने से वैश्विक वित्तीय स्थिरता के समक्ष जोखिम को लेकर आगाह किया है और वृद्धि को गति देने के लिये बही-खातों को दुरुस्त करने का आह्वान किया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की सालाना बैठक में कहा, ‘‘अव्यवस्थित रुप से निजी कर्ज को कम करने के उपाय से भी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इन जोखिमों से बचाव के लिये प्रतिरोधक क्षमता तैयार कर तथा बही खातों पर रिण के बोझ को कम कर नीति मसौदे को मजबूत करना होगा।''

उन्होंने कहा, ‘‘बैंलेस-शीट को दुरुस्त करने के लिये उत्पाद और श्रम बाजार सुधारों से लाभ और जोखिम प्रबंधन गतिविधियों को मजबूत बनाने से किसी भी प्रतिकूल परिस्थति से निपटने की क्षमता और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।'' अपने संबोधन में जेटली ने कहा कि विदेशों में वित्त पोषण की स्थिति आसान होने और जिंसों के दाम में सुधार से ऐसा लगता है कि वित्तीय स्थिरता सुधरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिये जोखिम बना हुआ है जिसका कारण निम्न और नकारात्मक ब्याज दर, निजी कर्ज का अधिक होना और बैंक प्रणाली में बड़ी संख्या में रिणों का खराब होना है।'' जेटली ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोकलुभावन और अलग-थलग करने की सोच से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है। उन्होंने वैश्विक वृद्धि को आगे बढ़ाने के लिये बहुपक्षीय प्रयासों की वकालत की।

वित्त मंत्री जेटली ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत की अच्छी वृद्धि के साथ उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीईएस) ने विकसित देशों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि कमजोर वैश्विक मांग से चुनौतीपूर्ण वृहत आर्थिक स्थिति और जिंसों से आय में कमी के कारण उत्पन्न कठिनाइयों से ईएमडीईएस में परिदृश्य पूर्व के मुकाबले असंतुलित और सामान्य तौर पर कमजोर बना हुआ है।'' उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय तक उदार मौद्रिक नीति का ईएमडीईएस के लिये गंभीर प्रभाव होगा।

जेटली के अनुसार इस बात को लेकर भी चिंता है कि अमेरिकी मौद्रिक नीति के सामान्य होने से वैश्विक वित्तीय बाजार उतार-चढ़ाव और ईएमडीईएस को पूंजी प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीति सामान्यीकरण से उत्पन्न वित्तीय स्थिरता जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।

जेटली ने कहा कि वैश्विक वित्तीय और आर्थिक स्थिरता को लेकर जोखिम बढ़ने से आईएमएफ और विश्वबैंक के कामकाज पर प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव विशेष रुप से उनके संसाधनों की मांग बढ़ने की संभावना के संदर्भ में है। उन्होंने कहा कि दोनों वित्तीय संस्थानों के पास पर्याप्त संसाधन होना चाहिए ताकि टिकाऊ विकास लक्ष्य को लेकर विकास की महत्वकांक्षा के व्यापक फलक को देखते हुए जरुरतों को पूरा किया जा सके। जेटली ने कहा कि पर्याप्त ढांचागत सुविधा, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये वित्त के अंतर को पाटने के साथ संकट को दूर करने और संघर्ष को रोकने के लिये अरबों डालर की जरुरत है।

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