राष्ट्रमंडल से अलग हुआ मालदीव, लगाया ताकाझांकी का आरोप

राष्ट्रमंडल से अलग हुआ मालदीव, लगाया ताकाझांकी का आरोपमोहम्मद नशीद, पूर्व राष्ट्रपति

माले (भाषा)। मालदीव ने गुरुवार को स्वयं को राष्ट्रमंडल से अलग कर लिया। उसने 2012 में राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ता से हटाने की परिस्थितियों पर और उसके बाद राजनीतिक संकट सुलझाने की दिशा में प्रगति नहीं होने पर द्वीप राष्ट्र को सजा देने के समूह के फैसले को ‘‘अन्यायपूर्ण'' बताया।

मालदीव के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रमंडल छोड़ने के इस फैसले को ‘‘मुश्किल'' और ‘‘अपरिहार्य'' बताया। राष्ट्रमंडल 53 देशों का समूह है, जिसके ज्यादातर सदस्य ब्रिटिश साम्राज्य के पूर्व उपनिवेश हैं। पिछले महीने राष्ट्रमंडल मंत्रिस्तरीय कार्रवाई समूह ने राजनीतिक संकट सुलझाने की दिशा में प्रगति नहीं होने पर ‘‘गहरी निराशा'' जताते हुए मालदीव को संगठन से निलंबित करने की चेतावनी दी थी।

राष्ट्रमंडल के लिए बेहद महत्वपूर्ण मालदीव ने कहा कि लोकतंत्र को बढ़ावा देने के नाम पर समूह ने देश का उपयोग सिर्फ संगठन की प्रासंगिकता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में लाभ को बढ़ाने के लिए किया।

मालदीव के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘2012 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति (नशीद) के इस्तीफा देने और संविधान में तय प्रक्रिया के तहत सत्ता का हस्तांतरण होने के बाद से ही राष्ट्रमंडल मालदीव के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहा है।''

बयान के अनुसार, ‘‘मालदीव को दंड देने का राष्ट्रमंडल का फैसला अन्यायपूर्ण है, विशेष रूप से तब जब राष्ट्रमंडल की मदद से गठित राष्ट्रीय जांच आयोग ने पाया कि मालदीव में सत्ता का हस्तांतरण संविधान के प्रावधानों के अनुरूप हुआ है।'' मालदीव ने कहा कि तभी से सीएमएजी और राष्ट्रमंडल सचिवालय ने मालदीव के साथ ‘‘अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण'' व्यवहार किया है।

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