हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर रोये अजादार

हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर रोये अजादारmuhharram

रिपोर्ट: बसंत कुमार

लखनऊ। राजधानी में मुहर्रम का दसवां दिन बेहद गम और मातम के साथ मनाया गया। शहर के चौक से तालकटोरा स्थित कर्बला तक जुलूस निकालकर शिया समुदाय के लोगों ने मातम मनाया। राजधानी में सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ अर्ध सैनिक बल के जवान भी मौजूद रहे।

शहादत को याद किया

चौक से चलकर जुलूस तालकटोरा स्थित कर्बला में पहुंचा, जहाँ लोगों ने मातम मनाया और पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों और परिवार वालों के साथ यजीद ने मार दिया था। 72 लोगों में इमाम हुसैन का छह महीने का बेटा भी शामिल था। इमाम हुसैन की याद में निकले ताजिया को कर्बला में दफनाया गया। जुलूस में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए। महिलाएं रो-रो कर इमाम हुसैन को याद कर रही थीं। ताजिया इमाम हुसैन का प्रतीक है।

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अज़ादारी का मरकज लखनऊ

देश भर में लखनऊ का मुहर्रम मशहूर है। इसका कारण स्थानीय निवासी सैयउद सबी हैदर रिजवी बताते हैं कि हिन्दुस्तान में अज़ादारी का मरकज लखनऊ ही है। पूरे भारत में मातम मनाने का सिलसिला लखनऊ से ही शुरू हुआ। यहाँ अवध के नवाबों के समय से ही मातम मनाया जाता है।

सुरक्षा का मजबूत इंतजाम

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चौक से लेकर तालकटोरा स्थित कर्बला तक यूपी पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद दिखाई दिए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यहाँ मिनट भर में हालात बिगड़ जाते हैं, जिसके कारण सुरक्षा मजबूत की गई है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि जुलूस के दौरान यहाँ सन 1969, 71, 74 और 77 में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच बड़ी लड़ाई हो चुकी है, जिसके कारण यहाँ सुरक्षा का इंतजाम हर साल किया जाता है।

केवड़ा गुलाब से ठीक हो जाते हैं मातम मनाने वाले

मसीहा कैंसर वेलफेयर सोसायटी से जुड़ी डॉक्टर टी रिज़वी तालकटोरा कर्बला के पास मातम मनाते वक़्त घायल लोगों का मरहम-पट्टी कर रही थी। रिज़वी यह काम पिछले 32 सालों से कर रही हैं। रिजवी बताती हैं कि मातम मनाने वाले लोगों को हम केवड़ा गुलाब के अलावा कुछ भी नहीं लगाते हैं और बिना किसी सुई और दवा के ही ये लोग दो से तीन दिन में ठीक हो जाते हैं।

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