साधारण कद-काठी वाले शास्त्रीजी के इरादे चट्टान की तरह थे मजबूत

Neeraj TiwariNeeraj Tiwari   2 Oct 2016 1:26 PM GMT

साधारण कद-काठी वाले शास्त्रीजी के इरादे चट्टान की तरह थे मजबूतलालबहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनने के बाद बधाई देने उमड़ी थी भीड़।

लखनऊ। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के गुणों के बारे में बखान करना सूरज को दीया दिखाने समान है। वह भी ऐसे समय में जब भारत-पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों में और गर्माहट आ गई है तब शास्त्री जी के बोले गए बोलों से देशवासियों को और मजबूती मिल सकती है। वे भले ही एक साधारण कद-काठी के इंसान दिखते थे मगर उनके हौसले की दीवार इतनी मजबूत थी कि बड़ी से बड़ी परेशानी भी उनके सामने घुटने टेक देती थी। यही कारण है कि जब शास्त्री जी ने कुर्सी संभाली थी तब देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उसकी सुरक्षा को भी मजबूत करने का दायित्व उन्होंने बखूबी संभाला था। ऐसे में आइए शास्त्री जी के दिए बोलों से उनके व्यक्तित्व को जानने की कोशिश करते हैं…

1. जैसा मैं दिखता हूँ उतना साधारण मैं हूँ नहीं।

2. आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे जरूरी है, जिससे हम अपने सबसे बड़े दुश्मन गरीबी और बेराजगारी से लड़ सके।

3. हमारी ताकत और मजबूती के लिए सबसे जरूरी काम है वो लोग में एकता स्थपित करना है।

4. लोगों को सच्चा लोकतंत्र और स्वराज कभी भी हिंसा और असत्य से प्राप्त नहीं हो सकता।

5. क़ानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना बरकरार रहे और भी मजबूती भी।

6. यदि कोई एक व्यक्ति भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए तो भारत को अपना सिर शर्म से झुकाना पड़ेगा।

7. आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं है। पूरे देश को मजबूत होना होगा।

8. हमारा रास्ता सीधा और स्पष्ट है। अपने देश में सबके लिए स्वतंत्रता और संपन्नता के साथ समाजवादी लोकतंत्र की स्थापना और अन्य सभी देशों के साथ विश्वशांति और मित्रता का संबंध रखना।

9. देश के प्रति निष्ठा सभी निष्ठाओं से पहले आती है और यह पूर्ण निष्ठा है क्योंकि इसमें कोई प्रतीक्षा नहीं कर सकता कि बदले में उसे क्या मिलता है।

10. हमारी ताकत और स्थिरता के लिए हमारे सामने जो ज़रूरी काम हैं उनमें लोगों में एकता और एकजुटता स्थापित करने से बढ़कर कोई काम नहीं है।

11. जो शाशन करते हैं, उन्हें देखना चाहिए कि लोग प्रशासन पर किस तरह प्रतिक्रिया करनी है। अंतत: जनता ही मुखिया होती है।

12. हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं।

13. मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार यह है कि समाज को एकजुट रखा जाए ताकि वह विकास कर सके और अपने लक्ष्यों की तरफ बढ़ सके।

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