ये वैन चालक बहुत जल्द भूल गए भदोही का भयानक हादसा

ये वैन चालक बहुत जल्द भूल गए भदोही का भयानक हादसाschool van accident

लखनऊ। स्कूल वैन की बेपरवाह रफ्तार बच्चों की जान पर खतरा बन चुकी है और जिम्मेदार लापरवाही की सारी हदें पार कर चुके हैं। ऐसी ही एक दुघर्टना शुक्रवार सुबह 1090 चौराहे पर हुई। जहां लॉरेटो कॉन्वेंट के बच्चों को स्कूल छोड़ने वाली वैन तेज रफ्तार की वजह से कार से टकरा गई। उस समय वैन में नौ बच्चे सवार थे, जिनमें से एक बच्ची को काफी चोट आई। स्कूल, वैन मालिक और पुलिस की मिलीभगत से मामले को रफा-दफा कर दिया गया। अभिभावकों को कानूनी दांवपेंच में उलझा दिया गया, इस वजह से उन्होंने कोई रिपोर्ट तक नहीं की और बच्ची की मरहम पट्टी करा कर उसको घर ले गये।

तेज रफ्तार में दौड़ा रहा था गाड़ी

शुक्रवार सुबह गोमतीनगर में बच्चों से भरे एक स्कूली वैन को इनोवा कार में टक्कर हो गई। घटना गोमतीनगर के 1090 चौराहे पर हुई। इस वैन का नंबर यूपी 32ईएच-1256 है। इरादतनगर डालीगंज का रहने वाला अमर मिश्रा इस गाड़ी को तेज रफ्तार पर दौड़ा रहा था।

चलाया था अभियान, नहीं दिखा बदलाव

जुलाई में भदोही में स्कूल वैन चालक के लापरवाही के कारण एक स्कूल वैन पैसेंजर ट्रेन से टकरा गई थी। इस घटना में वैन में सवार 19 छात्रों में से 7 की मौत हो गयी थी। चालक ईयरफोन लगाकर वैन चला रहा था। इस भयानक हादसे के बाद लखनऊ में आरटीओ के अधिकारीयों ने वैन चालकों को लेकर अभियान चलाया। अधिकारीयों ने स्कूलों के बाहर वैन की जाँच किया। चेकिंग के दौरान कई वाहन चालकों के पास लाइसेंस नहीं मिला तो कई गाड़ियों की स्थिति खराब मिली। घटना के बाद लखनऊ आरटीओ के अधिकारीयों ने कहा था कि स्कूली वाहनों की अब रोजाना चेकिंग की जाएगी, लेकिन ऐसा हकीकत में नहीं हुआ।

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शिवानी भी भुगत चुकी है हादसा

हजरतगंज के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा शिवानी बताती हैं कि वैन चालक भी आम चालकों की तरह रेड लाइट होने के बावजूद सड़क पार करने की कोशिश करते हैं। शिवानी का स्कूल वैन भी एकबार दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें शिवानी को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। हजरतगंज में तैनात एक ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि स्कूल वैन के पीछे लिखा होता है कि 'सावधान बच्चे हैं', लेकिन सबसे ज्यादा लापरवाही से गाड़ी वैन चालक ही चलाते हैं। हजरतगंज थाने के एसआई रामप्रकाश बताते हैं कि 'मेरे क्षेत्र में पिछले एक साल में स्कूल वैन से जुड़ी कोई दुर्घटना नहीं हुई है। वैन चालक मनमाने तरीके से वाहन चलाते नजर आते हैं तो हम उनपर करवाई भी करते हैं।

नियम को ताक पर रखकर बच्चों को ढो रहे वैन चालक

जिस भी वाहन को स्कूल द्वारा बच्चों को लाने-छोड़ने के लिए रखा जाता है, उसके लिए कुछ मानक तय है, लेकिन राजधानी में ही इन मानकों को ताक पर रख उन गाड़ियाँ का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो तय मानक को पूरा नहीं कर रही है। स्कूल वैन के रूप में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का कमर्शियल पंजीकरण और परमिट होना ज़रूरी होता है और साथ ही गाड़ियों को वैन के रूप में इस्तेमाल करने से पहले उसका फिटनेस प्रमाण पत्र जमा कराना होता है। स्कूली वैन के रूप में सिर्फ चारपहिया गाड़ियों को ही अनुमति दी जा सकती है, लेकिन राजधानी में स्कूल वैन के रूप में डिब्बा बंद गाड़ी, ऑटो, मैजिक और ई-रक्शा का इस्तेमाल हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल वैन के लिए जारी निर्देश

  • वाहन के आगे और पीछे ‘स्कूल बस' लिखा हो।
  • स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए।
  • भाड़े वाली बसों पर ‘स्कूल ड्यूटी’ लिखी हो।
  • वाहन की क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठा सकते।
  • बस पर एक देखभाल करने वाला अटेंडेंट हों।
  • बस के पीछे स्कूल का नाम व फोन नम्बर लिखा हो।
  • वाहनों में प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध होना जरूरी।
  • वाहनों में आग बुझाने वाले यंत्र लगाये जाए।

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