10 वर्ष सरकारी सेवा वरना 50 लाख रुपये का जुर्माना 

10 वर्ष सरकारी सेवा वरना 50 लाख रुपये का जुर्माना (फोटो साभार: गूगल)

लखनऊ। प्रांतीय चिकित्सा सेवा के डॉक्टर अगर सरकारी आरक्षण व्यवस्था के तहत पीजी डिप्लोमा करेंगे तो उनको 10 वर्ष तक अनिवार्य सरकारी सेवा देनी होगी। वरना उनसे 50 लाख रुपये का जुर्माना राज्य सरकार वसूलेगी।

यहां लागू होंगे नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर अध्ययन (डिप्लोमा) के लिए अर्हताएं एवं शर्तों के निर्धारण की नई व्यवस्था लागू की है। निर्धारित अर्हताएं एवं शर्तें राजकीय स्नातकोत्तर मेडिकल कॉलेजों, केजीएमयू लखनऊ और ऑल इण्डिया हाइजिन इंस्टिट्यूट कोलकाता के डिप्लोमा इन पब्लिक हेल्थ में प्रभावी होंगी। पीजी डिप्लोमा में अध्ययन के लिए निर्धारित अर्हताएं एवं शर्तें वर्ष 2017-18 से लागू होंगी। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अरूण कुमार सिन्हा ने बृहस्पतिवार को दी।

तब करना होगा दस लाख का भुगतान

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत पीजी डिप्लोमा कोर्स में सीटों के आरक्षण की व्यवस्था भी अनुमन्य होगी। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के नाम से एकल पात्रता सह प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। सह प्रवेश परीक्षा का समस्त पयर्वेक्षण, नियंत्रण और निर्देशन का अधिकार भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा निहित प्राविधानों के अनुसार होगा। सिन्हा ने बताया कि स्नातकोत्तर मेडिकल डिप्लोमा के प्रत्येक अभ्यर्थी को अनुबंध भी करना होगा। अन्तिम काउंसलिंग के बाद यदि अभ्यर्थी स्वयं से प्रवेश नहीं लेता है, तो उसे 10 लाख रुपये का भुगतान राज्य सरकार को करना होगा। यदि अभ्यर्थी स्नातकोत्तर डिप्लोमा में प्रवेश लेने के बाद अध्ययन बीच में ही छोड़ता है, तब भी उसे 10 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। इसके साथ ही चिकित्सक को अगले तीन वर्षों तक प्रवेश हेतु प्रतिबंधित भी कर दिया जाएगा। डिप्लोमा प्राप्त करने वाले चिकित्साधिकारियों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में न्यूनत्म 10 वर्ष की सेवा करनी जरूरी होगी। चिकित्साधिकारी द्वारा ऐसा न करने पर उसे 50 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ेगा।

दूर और दुर्गम स्थानों पर सेवा में मिलेगा लाभ

चिकित्साधिकारियों की मेरिट के निर्धारण में वरीयता देने का भी प्राविधान किया गया है। यह वरीयता दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में की गई सेवा के लिए दी जाएगी। चिकित्सकों को इन क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष की सेवा के लिए 10 प्रतिशत अंक प्रोत्साहन स्वरूप मिलेंगे। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में अधिकत्म 30 प्रतिशत अंक दिए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत स्थान शासकीय सेवा में कार्यरत ऐसे चिकित्सा अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे, जो कम से कम तीन वर्ष तक दुर्गम एवं दुरूह क्षेत्रों में सेवारत रहे हों।

अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना आवश्यक

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया तथा शिक्षण कार्य के लिए समय सारिणी का निर्धारण कर दिया गया है। अब विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया दो मई तक प्रारम्भ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि स्नातकोत्तर मेडिकल डिप्लोमा में प्रवेश के लिए चिकित्सा अधिकारी की अधिकत्म आयु सीमा 45 वर्ष होगी। डिप्लोमा में प्रवेश के लिए चिकित्सक को अपने नियंत्रक अधिकारी से अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। स्नातकोत्तर मेडिकल डिप्लोमा के अभ्यर्थियों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशलय, उप्र से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना आवश्यक होगा।

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