चार नवंबर को प्रभाव में आएगा पेरिस जलवायु समझौता

चार नवंबर को प्रभाव में आएगा पेरिस जलवायु समझौताचार नवंबर को प्रभाव में आएगा पेरिस जलवायु समझौता 

संयुक्त राष्ट्र (भाषा)। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बान की मून ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता चार नवंबर को प्रभाव में आएगा। इस समझौते को लागू करने के लिए 55 प्रतिशत वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार कम से कम 55 देशों के हस्ताक्षर जरूरी थे और यह आंकड़ा पार करने के साथ ही इस समझौते को लागू किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। कुल 72 देशों ने इस समझौते का अनुमोदन किया है जो 56 प्रतिशत वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।

पूर्वशर्त पूरी होने के बाद महासचिव ने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण क्षण है।'' उन्होंने कहा, ‘‘पेरिस समझौते को वर्ष 2016 में लागू किए जाने संबंधी वैश्विक गति उल्लेखनीय रही है। जो एक समय असंभव सा लग रहा है, उसे अब कोई नहीं रोक सकता। लागू किए जा रहे पेरिस समझौते के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन इस दिशा में कार्रवाई किए जाने की जरुरत का प्रमाण है और यह इस बात को लेकर सरकारों की आम सहमति को दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्य पर आधारित मजबूत वैश्विक सहयोग आवश्यक है।''

विश्व में ग्रीनहाउस गैसों के तीसरे सबसे बडे उत्सर्जक देश भारत ने गांधी जयंती के अवसर पर दो अक्तूबर को पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन किया। इसके साथ ही वह जलवायु परिवर्तन पर अनुमोदन संबंधी अपना दस्तावेज जमा कराने वाला 62वां देश बन गया और इस समझौते को प्रभावी होने के बेहद निकट ले आया। बान ने पेरिस समझौते का अनुमोदन और इसे औपचारिक रुप से स्वीकार करने को लेकर भारत को हार्दिक बधाई दी थी और कहा था कि भारत के नेतृत्व ने इस ऐतिहासिक समझौते को इस वर्ष लागू करने के लिए आवश्यक 55 प्रतिशत की सीमा के निकट ले जाने में अहम कदम उठाया।

भारत विश्व के 4.1 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है और भारत के अनुमोदन के बाद इसे लागू करने के लिए आवश्यक 55 प्रतिशत उत्सर्जन का आंकड़ा छूने के लिए तीन प्रतिशत अंकों से कुछ ही अधिक की आवश्यकता थी।

आस्ट्रिया, बोलीविया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हंगरी, माल्टा, नेपाल, पुर्तगाल और स्लोवाकिया के साथ-साथ यूरोपीय संघ ने महासचिव को बुद्धवार को अपने अनुमोदन संबंधी दस्तावेज सौंप दिए, जिसके बाद इसे लागू किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। यह समझौता अब नवंबर में मोरक्को में होने वाले जलवायु सम्मेलन (COP 22) से पहले लागू हो जाएगा। इस सम्मेलन में समझौते के पक्षों की पहली बैठक होगी। अभी तक अनुमोदन नहीं करने वाले देश पर्यवेक्षकों के रुप में शामिल हो सकते हैं।

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