वीरता और युद्ध गाथाएं संजोए है भोपाल का शौर्य स्मारक 

वीरता और युद्ध गाथाएं संजोए है भोपाल का शौर्य स्मारक वीरता और युद्ध गाथाएं संजोए है भोपाल का शौर्य स्मारक 

भोपाल (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में निर्मित शौर्य स्मारक में वीरता और युद्ध की गाथाएं संजोई गई हैं। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अक्टूबर को इस स्मारक का लोकार्पण करेंगे। लगभग 12 एकड़ में फैले इस स्मारक में मानव सभ्यता के आदिकाल से आधुनिक काल तक के युद्धों के दृश्य दिखाए गए हैं। स्वतंत्रता के बाद हुए युद्धों के लगभग 70 फोटो भी यहां लगी हैं। यहां आने वालों को सियाचिन की कठिन परिस्थितियों का अहसास होगा।

सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपतियों और तीनों सेनाओं के अध्यक्षों के चित्र भी लगाए गए हैं। वीरता और शौर्य से भरी कविताएं भी उकेरी गई हैं। 60 सीटों वाला एक थियेटर भी है, जिसमें शौर्यपूर्ण लघु फिल्में दिखाई जाएंगी।

स्मारक में जीवन का अहसास, मृत्यु और मृत्यु के परे जीवन की संकल्पनाओं का अनुभव कराने का प्रयास किया गया है। जब बाहर से इस हिस्से में पहुंचते हैं तो अंधकार छा जाता है। कुछ देर बाद धीरे-धीरे अंधेरा छंटने लगता है, रोशनी बढ़ती है और आगे बढ़ने पर फिर उजाला ही उजाला नजर आता है। इतना ही नहीं, युद्ध की आवाजें भी संयोजित की गई हैं। शौर्य स्तंभ निर्माण की संकल्पना मृत्यु पर विजय है। स्तंभ के नीचे लाल बिंदु रक्त का प्रतीक है। सर्वोच्च पर सफेद जीवन को प्रदर्शित करता है। शौर्य स्तंभ के पीछे स्वतंत्र भारत के वीरगति प्राप्त करने वाले प्रदेश के शहीदों के नाम अंकित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन के दिन इस शौर्य स्तंभ में निरंतर जलने वाली ज्योति भी प्रज्जवलित करेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को इस स्मारक का भ्रमण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि शौर्य स्मारक देशभक्ति की प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यहां आने वाले को भारतीय सैनिकों के शौर्य का परिचय मिलेगा। इससे नागरिकों को गौरव का अहसास होगा। उनमें देशभक्ति, देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा के भाव जगेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद शहीदों की स्मृति में बनने वाला पहला स्मारक है। अभी जो स्मारक है, वे युद्ध स्मारक हैं। यह शहीदों के शौर्य की स्मृतियों का स्मारक है। यहां इसका अहसास होगा कि कितनी कठिन परिस्थितियों में हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हैं।

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