विजयादशमी के दिन यूपी के इस गाँव में लोग मनाते हैं शोक

विजयादशमी के दिन यूपी के इस गाँव में लोग मनाते हैं शोकविजयादशमी के दिन यूपी के इस गाँव में लोग मनाते हैं शोक

लखनऊ। विजयादशमी के दिन पूरा देश खुशी से झूम रहा होता है। जगह-जगह रावण के पुतले फूंके जाते हैं। मगर उत्तर प्रदेश के गुड़गांव स्थित बिसराख गाँव में दशहरे का दिन मातम का होता है। वे रावण के दहन पर शोक जताते हैं।

रावण के पिता मुनि विश्रवा का जन्म हुआ था बिसराख गाँव में

इस अजीबोगरीब मान्यता के पीछे का मुख्य कारण यह है कि इस गाँव को कथित रूप से रावण की जन्मस्थली कहा जाता है। यहां के ग्रामीण विजयादशमी के रोज एक भव्य यज्ञ का आयोजन करके रावण की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं। देश की राजधानी से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर स्थित बिसराख गाँव को लेकर यह मान्यता है कि लंकेश के पिता विश्रवा मुनि का जन्म यहीं हुआ था। यही कारण है कि दशमी के दिन इस गाँव के लोग यहां बने एक प्राचीन मंदिर में हवन कर रावण की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। यह भी कहा जाता है कि दशानन के पिता मुनि विश्रवा को इसी जगह पर शिवलिंग की प्राप्ती हुई थी। यहां के कुछ मंदिरों में रावण की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

राजस्थान में भी है रावण की मूर्ति वाला मंदिर

हालांकि, बिसराख गाँव अकेला ऐसा गाँव नहीं है जहां रावण दहन के रोज खुशियां नहीं मनाई जाती हैं। ऐसे ही कई अन्य गाँव भी हैं जहां यह दिन खुशी का दिन नहीं माना जाता है। इसी क्रम में मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी राजा मांदावार की बेटी थीं। राजा मांदावार राजस्थान के मंदौर गाँव के रहने वाले थे। यही कारण है कि मंदौर ग्राम में भी रावण दहन के दिन खुशी नहीं मनाई जाती है। यहां करीब आठ साल पहले रावण की मूर्ति भी स्थापित की गई थी।


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