उर्दू शायरी ने हिंसा पीड़ित घाटी में दिलों को सुकून देने का करामाती काम किया: प्रधान न्यायाधीश 

उर्दू शायरी ने हिंसा पीड़ित घाटी में दिलों को सुकून देने का करामाती काम किया: प्रधान न्यायाधीश प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर 

जम्मू (भाषा)। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा है कि उर्दू शायरी ने खासकर उस जम्मू्-कश्मीर में लोगों के दिलों को सुकून देने का करामाती काम किया है जिसने इतनी हिंसा और रक्तपात देखा है। न्यायमूर्ति ठाकुर ने यहां एक उर्दू मुशायरे में कहा, ‘‘उर्दू खूबसूरत जुबान है। यह उन लोगों को भी दिली सुकून देती है जिनका इस जुबान से कोई सरोकार नहीं है।''

उन्होंने कहा, ‘‘आज के हालात में, जब खासकर इस घाटी में हर जगह इतनी हिंसा और इतना खून खराबा है, ऐसे में हकीकत को सामने लाने की उर्दू शायरों की कोशिशें काबिले तारीफ हैं।'' कानून एवं न्याय विभाग एवं जम्मू कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी ने प्रधान न्यायाधीश के सम्मान में इस मुशायरे का आयोजन किया था। इस समारोह में राज्य के जाने माने शायरों ने शिरकत की और अपनी शायरी से दर्शकों का मन मोह लिया।

इस कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति हाजी अनायत अली, कानून एवं न्याय मंत्री अब्दुल हक खान, राजस्व, राहत एवं पुनर्वास मंत्री सैयद बशरत बुखारी, शिक्षा राज्य मंत्री प्रिया सेठी, जेकेएएसीएल सचिव अजीज हाजीनी और वरिष्ठ कानूनविदों ने हिस्सा लिया। इस मुशायरे की अध्यक्षता जाने माने कवि आरेश ने की। शायरों ने अपनी शायरी के जरिए समकालीन सामाजिक राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाया और आम आदमी के सामने मौजूद मामलों को रेखांकित किया।


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