जयललिता के निधन के बाद धीमी पड़ी चेन्नई की रफ्तार

जयललिता के निधन के बाद धीमी पड़ी चेन्नई की रफ्तारसुबह से शहर की सड़कें वीरान रहीं और भोजनालयों सहित दुकानें भी बंद रहीं।

चेन्नई (भाषा)। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद चेन्नई में जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। सुबह से शहर की सड़कें वीरान रहीं और भोजनालयों सहित दुकानें भी बंद रहीं।

ऑटोरिक्शा सहित सार्वजनिक परिवहन सेवा सड़कों से नदारद रहीं, जबकि कुछ निजी वाहनों को शहर के विभिन्न हिस्सों में चलते देखा गया। पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण स्थलों पर कड़ी निगरानी बरत रहे हैं। बीती शाम से शहर में और राज्य के अन्य कई हिस्सों में करीब-करीब पूर्णत: बंद जैसी स्थिति है। आज सबका ध्यान ‘राजाजी हॉल' पर केंद्रित है, जहां दिवंगत मुख्यमंत्री का पार्थिव शरीर रखा गया है ताकि लोग अपनी नेता के अंतिम दर्शन कर सकें।

शहर में हर सुबह आमतौर पर यहां चाय की दुकानों पर गहमागहमी बनी रहती है और बेहतर कारोबार होता है। आज चाय की दुकानें भी बंद हैं। कुछ जगहों पर चाय बेचने वालों को घूम घूमकर चाय बेचते देखा गया। होटल भी बंद रहे। उपनगरीय ट्रेन सेवाओं का परिचालन शहर में जारी है लेकिन उनमें यात्रियों की बेहद कम तादाद दिखी। बहरहाल, चेन्नई सेंट्रल और एग्मोर स्टेशनों पर आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें समय पर पहुंचीं।

अपनी दिवंगत नेता के सम्मान में राज्य सरकार ने आज अपने सभी दफ्तरों में अवकाश की घोषणा की है। शैक्षणिक संस्थानों में तीन दिन के अवकाश की घोषणा की गई है। तमिल फिल्म उद्योग ने आज शूटिंग के सभी कार्यक्रम रद्द करने का ऐलान किया है। सिनेमाघरों में भी शो रद्द कर दिए गए हैं।

मदुरै से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जयललिता के निधन की खबर से समूचा मंदिरों का नगर शोकाकुल है। शहर में दुकानें बंद हैं और बस एवं ऑटोरिक्शा समेत तमाम परिवहन सुविधाएं सड़कों से नदारद दिखीं।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘समूचे शहर में गहरी और अजीब सी शांति है।'' अधिकारियों ने बताया कि आज सुबह ट्रेनों और विमानों से मदुरै पहुंचने वाले लोगों को घर पहुंचने के लिए निजी वाहनों की सहायता लेनी पड़ी। मुख्य बस अड्डे पर वीरानी पसरी थी। केरल और कर्नाटक सहित विभिन्न स्थानों से यहां आने वाली अंतरराज्यीय एवं लंबी दूरी की सरकारी बसों को राज्य की सीमा पर रोक दिए जाने के कारण वे यहां नहीं पहुंच पाईं।

जयललिता के निधन के कारण तूतीकोरिन, रामेश्वरम और कन्याकुमारी में मछुआरों की कॉलोनियां शोकसंतप्त दिखीं। पुलिस ने बताया कि क्षेत्र में किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

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