अगर नदियां जोड़ी होती तो बुंदेलखंड में ये तबाही नहीं आती ?

अगर नदियां जोड़ी होती तो बुंदेलखंड में ये तबाही नहीं आती ?gaonconnection

लखनऊ। जुलाई शुरू होते ही झमाझम बारिश ने सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। लेकिन इन जिलों को सूखे और बाढ़ से बचाया जा सकता है अगर केन और बेतवा नदी को आपस में जोड़ दिया जाए। बुंदेलखंड के जिन क्षेत्रों में अभी बाढ़ आई है, अगर एक सप्ताह पीछे जाकर देखें तो इन्हीं क्षेत्रों में टैंकरों से पीने का पानी पहुंचाया जा रहा था।

कानपुर आईआईटी से इंजीनियर और बुंदेलखंड में सिंचाई विभाग में 40 वर्ष तक कई परियोजनाओं में इंजीनियर रहे कुलदीप कुमार जैन कहते हैं, “केन नदी और बेतवा नदी को जोड़ दिया जाए तो बुंदेलखंड को सूखे और बाढ़ से बचाया जा सकता है। केन नदी पर सिर्फ एक बरियारपुर बांध है, जबकि बेतवा पर कई हैं, इसलिए केन नदी में बाढ़ जल्दी आती है, जबकि बेतवा में अपेक्षाकृत ऐसी स्थिति कम ही आती है।”

वर्ष 2005 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और एमपी के मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने केन और बेतवा नदी को जोड़ने के लिए हस्ताक्षर किए थे। लेकिन उसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने भी 30 नदियों को आपस में जोड़ने के लिए 5.6 लाख करोड़ की महात्वकांक्षी परियोजना की घोषणा की थी। इसमें भी केन और बेतवा लिंक परियोजना को प्राथमिकता दी गई थी। परियोजना में केन घाटी के अतिरिक्त पानी को बेतवा घाट के कम पानी वाले इलाक़े में ले जाना था।

केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक हफ्ते में हुई बारिश के बाद गंगा, यमुना, केन और मंदाकिनी समेत कई नदियां उफान पर हैं। जहां चित्रकूट में मंदाकिनी नदी, बांदा में केन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, वहीं सतना में बरसाती नदी के उफान बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। सतना में राहत और बचाव के लिए सेना और हेलीकाप्टर तक को तैनात किए गए हैं। मानसून की बारिश शुरु होने के साथ उत्तर प्रदेश के गोंडा, बाराबंकी समेत कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

पिछले साल जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा था कि केन-बेतवा नदी को जोड़ने का काम जनवरी-फरवरी, 2016 में शुरु हो जाएगा। लेकिन अभी भी कई बोर्ड से अनुमति न मिल पाने से इस परियोजना पर काम शुरु नहीं हो सका है।

“बांदा में 98 प्रतिशत बारिश का पानी बह जाता है, अगर इसे छोटे-छोटे बांध बनाकर रोका जाए तो भूजल स्तर बढ़ेगा, और बाढ़ का खतरा भी कम होगा,” कुलदीप कुमार जैन ने कहा, “चंदेल राजाओ ने भी छोटी-छोटी बंधियां बनाकर बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था की थी। इसका यही हल है। घर के पानी को घर में ही रोकना होगा।”

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