‘जैसे-जैसे बिरवा सूखत वैसे-वैसे हमरी जान सूखत’

‘जैसे-जैसे बिरवा सूखत वैसे-वैसे हमरी जान सूखत’अपनी सूख चुकी फसल के बारे में जानकारी मांगता किसान।

स्वयं डेस्क/ विष्णु तिवारी (कम्युनिटी जर्नलिस्ट) 32 वर्ष

सोनभद्र। 'साहब जरा इन बिरवन का देख लो बच्चन की तरह इत्ता बड़ा किया है। हमरा तो करेज बैठा जा रहा है इनका देख के। जैसे-जैसे बिरवा सूखत जात वैसे वैसे हमरी जान सूखत जात है।' यह कहना है बिचपई गाँव में कृषि विभाग कैंप में उपस्थित साइंटिस्ट से अपने खेत से लाये गए चने के पेड़ को दिखाते हुए अशोक विश्वकर्मा का।

जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर बिचपई गाँव में कृषि विभाग कैंप आयोजित किया गया था। इस ग्राम में अधिकतर किसान चना, मटर टमाटर और मिर्च की खेती करते हैं। बिचपई के किसान हमेशा नगदी फसल ही करते हैं। कैंप में कृषि सलाहकार वैज्ञानिक कृषि विभाग से कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। किसानों ने कैंप में कृषि से सम्बन्धित जानकारी और सलाह ली। कैंप में किसान अपने खेत की मिट्टी तक चेक करने आ रहे थे। इसी बीच एक किसान लंबी-लंबी सांस लेता हुआ कैंप में पहुंचा।

गुलाब सिंह सहायक विकास अधिकारी कृषि को चने का पौधा देते हुए बोला, "साब! जरा इन बिरवन का देख लो। इनमा न जाने का हुई गवा है। ई सूखत जात हैं। साब! हमरी फसल को बचा लो एकलौता इसी का सहारा है। हम तीन एकर मा चना लगौली है। पूरी फसल पिली पड़ के सूख रही है।"

किसानों को सरसों का बीज भी मुफ्त में बांटा गया।

गुलाब सिंह ने चने के पौधे की जांच-परख की और अपनी टीम से भी चर्चा की उसके बाद किसान अशोक को बताया, "तुम्हारी फसल की जड़ों में दीमक लग गई है। इस कारण फसल सूख रही है।" फिर उन्होंने किसान को फसल को बचने के के लिए उपचार और दवा की जानकारी दी। साथ ही, उसकी फसल को कीट पतंगों से बचने के लिए क्यूनालफास दवा भी दी। कृषि विभाग ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि विभाग की तरफ से चलाई जा रही सभी योजनाओं के बारे में भी बताया। साथ ही, किसान फसल बिमा योजना भी किया।

बिचपई गाँव के किसानों को इस बीच कृषि विभाग की तरफ से दो किलो के सरसों के बीज का मुफ़्त में वितरण किया गया। साथ ही, जिन किसानों ने अपनी फसल में कीड़े लगने की बात बताई थी उनको क्यूनालफास दवा भी दी गई। कृषि विभाग के कैंप में सुशील गिरी सहायक तकनिकी प्रबन्धक ब्रजेश सिंह तकनीकी सहायक शिव पूजन सिंह तकनीकी सहायक ने भी किसानों को कृषि सम्बंधित जानकारी और सुझाव दिए।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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