सावधान: आपके खाते में कोई और तो नहीं लगा रहा सेंध, क्लोन चेक से दिया जा रहा है झांसा

सावधान: आपके खाते में कोई और तो नहीं लगा रहा सेंध, क्लोन चेक से दिया जा रहा है झांसापुलिस की गिरफ्त में आए क्लोन चेक बनाकर रुपये निकालने वाले तीनों आरोपी।

लखनऊ। बैंक के कॉल सेंटर से किसी व्यक्ति के अकाउंट की जानकारी हासिल कर के कोरल ड्रा पर चेक बनाए जाते थे। इन्हीं क्लोन चेक के जरिये फिर दूसरे बैंकों से भुगतान निकाल कर अय्याशी की जाती थी। क्लोन चेक बनाकर बैंक से पैसा निकालने वाले एक बड़े गिरोह को उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ टीम ने बृहस्पतिवार को गोमती नगर से गिरफ्तार किया है।

तीन सदस्यी यह गिरोह क्लोन चेक बनाकर अवैध रूप से बैंक खातों से धनराशि निकालने का काम करता था। इस गिरोह का मास्टर माइंड अम्बेडकर नगर जिले के थाना विवान का रहने वाले आकाश सिंह है, उसके साथ ही इसी जिले का सुधीर कुमार और कुश दि्वेदी में इसमें शामिल थे। पुलिस ने इनके पास से पास से तीन डेबिट कार्ड, एक बजाज पल्सर बाइक, तीन मोबाइल फोन और नकदी बरामद की है।

एसटीएफ को पिछले कई दिनों से विभिन्न स्रोतों से लखनऊ और इसके आसपास के जिलों में विभिन्न बैंकों के माध्यम चेक को क्लोन करके बैंक से पैसा निकालने वाले गिरोह के बारे में जानकारी मिल रही थी। 22 नवंबर को बैंक ऑफ बड़ौदा, विनय खण्ड, गोमतीनगर के ग्राहक विनीत खंड निवासी अजीत प्रताप सिंह ने गोमती नगर थाना में मामला दर्ज कराया था कि अज्ञात व्यक्तियों चेक क्लोन करके उनके खाते से 90 हजार रुपए निकाल लिए हैं।

इस घटना को लेकर अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ इस थाने में मामला दर्ज हुआ था। इस घटना में शामिल अभियुक्तों को पकड़ने के लिए जिला पुलिस ने एसटीएफ से सहयोग मांगा था। जिसके बाद एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक शहाब रशीद खान और पुलिस उपाधीक्षक आलोक सिंह को अभियुक्तों को पकड़ने के लिए निर्देश दिया था। इस मामले की जब एसटीएफ ने जांच करनी शुरू कि तो बैंक के विवरण से पता चला कि मुफ्ती शोरू, वेव माल और मनोज पाण्डेय चौराहा स्थित पीजा शॉप व बियर शॉप में खरीददारी की गई है। इसके बाद से यहां सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। इसी क्रम में मुखबिर ने एसटीएफ को सूचना दी कि इस गैंग से संबंधित कुछ लोग गोमती नगर के विभूतिखण्ड स्थित वेव मॉल पर एकत्रित होने वाले हैं। एसटीएफ की टीम ने गुरूवार को तीनों अभियुक्तों को वेव मॉल के सामने पॉलिटैक्निक रोड से गिरफ्तार किया।

बैंकों की मिलीभगत के स्पष्ट प्रमाण

पुलिस की पूछताछ पर गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि इस घटना का मास्टरमाइंड आकाश है। बैंक के कॉल सेन्टर से बैंक खाते के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली जाती थी। वह ऐसे खातों की जानकारी हासिल करते थे जिनमें लंबे समय से कोई भी ट्रांजेक्शन न हुआ हो और धन भी ज्यादा हो। जिसके बाद में उन चेकों की बैंक से फोटो लेकर कर नया क्लोन चेक बना लेते थे। क्लोन चेक तैयार करने के लिये कोरल ड्रा सॉफ्टवेयर का उपयोग करते थे और उसके बाद उसी खाताधारक के बैंक एकाउन्ट का स्टेटमेन्ट प्राप्त करने के लिए उनके बैंक में खाताधारक के नाम से फर्जी हस्ताक्षर से आवेदन कर खाता की डिटेल प्राप्त कर लेते थे।

इसके बाद उसी बैंक की किसी भी शाखा में नया खाता खुलवाते और खाताधारक के बैंक एकाउन्ट से सम्बन्धित पास-बुक, चैक-बुक व एटीएम कार्ड आदि प्राप्त कर लिये जाते थे। बैंक से प्राप्त चैक-बुक में खाताधारक के नाम, एकाउन्ट नम्बर और दूसरे डिटेल को कैमिकल लगाकर मिटा देते थे। इसके बाद प्रिन्टर की सहायता से उस पर प्रयोग किए गए चैकों के खाताधारक के नाम, एकाउन्ट नंबर अंकित कर क्लोन चैक तैयार कर लिये जाते थे। फिर उस पर खाताधारक के फर्जी हस्ताक्षर करके किसी भी बैंक में प्रस्तुत करके धनराशि किसी अन्य फर्जी रूप से खोले गये खाता में हस्तांतरित करा दी जाती थी।

बैंक से जुड़े लोग व्हाट्सएप्प से भेजते थे चेक की कॉपी

आरोपियों ने यह भी बताया कि अजीत प्रताप सिंह के बैंक ऑफ बड़ौदा खाता से सम्बन्धित हस्ताक्षरयुक्त चैक की प्रति व्हाट्स एप्प के माध्यम से राहुल नामक व्यक्ति से मंगा ली गई थी और उसको क्लोन करके रमेशपीरजी सोनावड़े के नाम दोबारा चेक तैयार कर दिया गया, जिसमें रू 90000/- की धनराशि अंकित कर भुगतान हेतु बैंक में जमा कर दिया गया। इस आधार पर अजीत प्रताप सिंह के बैंक खाता से रू0 90,000/- की धनराशि की निकासी होकर रमेशपीरजी सोनावड़े के मुम्बई महाराष्ट्र स्थित उनके बैंक एकाउन्ट में चली गई, जिसका मैसेज प्राप्त होने पर अजीत प्रताप सिंह को इस धनराशि की निकासी की जानकारी हो गई और उन्होंने इस संबंध में बैंक प्रबन्धक को सूचित किया गया कि उन्होंने इस तरह का कोई चेक निर्गत नही किया है। इससे पहले कि बैंक की ओर से इसका भुगतान रोका जाता, अभियुक्तों ने रमेशपीरजी सोनावड़े के बैंक खाता में गई इस धनराशि से नेट बैंकिग के माध्यम से खरीदारी कर ली। खानपान और पेट्रोल आदि लेने पर धनराशि 49,000 रुपए खर्च भी कर दिया। बैंक की ओर से भुगतान रोके जाने के कारण बची हुए पैसे के यह लोग नहीं निकाल पाए। गिरफ्तार अभियुक्तों में कुश द्वेदी एसटीएफ ने क्लोन चेक प्रकरण में बीती 13 मार्च को भी गिरफ्तार हुआ था। गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ संतकबीर नगर जिले में भी कई मामले दर्ज हैं।

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