बड़े नोट बंद करने का फैसला यूपीए ने 2014 में लिया था, तब भाजपा ने किया था विरोध

बड़े नोट बंद करने का फैसला यूपीए ने 2014 में लिया था, तब भाजपा ने किया था विरोधमीनाक्षी लेखी, भाजपा प्रवक्ता

नई दिल्ली (आईएएनएस)। भाजपा ने 2014 में वर्ष 2005 से पहले के सभी नोटों के विमुद्रीकरण के तत्कालीन कांग्रेस सरकार के फैसले को गरीब विरोधी कहा था।

तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने जनवरी 2014 में काले धन पर रोक लगाने के क्रम में विमुद्रीकरण की घोषणा की थी। भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने उस निर्णय को एक गिमिक करार दिया था और कहा था कि यह विदेशी खातों में जमा काले धन के मुद्दे की तरफ से ध्यान हटाने की एक कोशिश है। यह बात उस समय के एक वीडियो रिकॉर्डिग से पता चली है।

उस समय इस नीति को गरीब विरोधी बताया था

लेखी ने उस निर्णय को गरीब विरोधी करार देते हुए कहा था कि इससे उन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिनके खाते स्विस बैंकों में हैं, बल्कि असर उनपर पड़ेगा जिनके पास भारत में भी कोई बैंक खाता नहीं है। लेखी ने कहा था, "वास्तव में जिनके पास काला धन है, वे उसे नए नोटों से बदल लेंगे। पीड़ित आम औरतें और आम आदमी है, जो अनपढ़ हैं और उनके पास बैंकिंग सुविधा सुलभ नहीं है।"

लेखी ने कहा था, "जिन्होंने कुछ पैसे बचा कर रखे हैं, और उनके पास कोई बैंक खाता नहीं है, उनके जीवन की कमाई निशाने पर होगी।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की थी कि 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट आधी रात से अवैध हो जाएंगे। इस घोषणा के बाद देशभर में बैंकों और एटीएम पर नए नोटों के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top