नेत्रहीन दुल्हन की कराई भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति से शादी

नेत्रहीन दुल्हन की कराई भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति से शादीनेत्रहीन सालनी की शादी के बने हजारों गवाह।

अरविन्द्र सिंह परमार (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट) 28 वर्ष

दिगौड़ा (टीकमगढ़)। धूमधाम से बारात निकली। सभी नाते-रिश्तेदार मेहमानों का स्वागत करने में जुटे थे। नेत्रहीन दूल्हन के विवाह में पूरा गाँव शरीक नज़र आ रहा था। मगर दूल्हे को देख सभी अचरज में पड़ गए। दूल्हे की बेदी पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रखी थी। इस अनोखे विवाह की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।

इस बारे में पूछने पर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के टीकमगढ़ के दिगौड़ा ग्राम के हरिहर नाथ (40 वर्ष) ने बताया, "23 वर्ष सालनी बिदुआ बचपन से ही नेत्रहीन है। मगर उसकी भक्ति भगवान कृष्ण के प्रति गहरी थी। वह उनसे ही विवाह करना चाहती थी। मीरा की तरह वह सुबह से शाम तक वृंदावन के बांके बिहारी की भक्ति में डूबी रहती थी।" वे आगे बताते हैं, "समय के साथ ही सालनी का प्रभू कृष्ण के प्रति प्रेम और श्रद्धा भी बढ़ता गया। वह अपने परिवार के लोगों से कहने लगी कि उसे अपने आराध्य देव से ही शादी करनी है। लोगों के काफी समझाने के बाद भी उस पर कोई असर नहीं पड़ा।"

जयमाल होते ही बांके बिहारी के लगने लगे जयकारे।

हरिहर के मुताबिक़, "समय के साथ ही सालनी की बढ़ती जिद और भक्ति ने सभी को चिंता में डाल दिया। सच में तो वह कृष्ण को ही अपना पति मान ही चुकी थी। इस नेत्रहीन की भक्ति को देखते परिवार के लोग भी एक दिन राजी हो गए। उन्होंने श्रीकृष्ण से अपनी बेटी की शादी कराने का निर्णय कर लिया।"

जानकारी के मुताबिक, यहां मध्य प्रदेश बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जनपद से 20 किमी उत्तर दिशा में दिगौड़ा गाँव के गोपाल मंदिर से बैंड-बाजा बजाते हुए बांके बिहारी की मूर्ति को दूल्हे की तरह सजाकर बारात रवाना हुई। इस अनोखी बारात में कई गाँवों के हजारों लोग झूमते-नाचते दूल्हन के घर पहुंचे। आलम यह था कि राहगीर भी इस अनोखे विवाह के गवाह बनने के लिए बारात में शामिल हो गए। इस बीच टीकमगढ़-झांसी मार्ग पर मेले जैसा माहौल बन गया।

सालनी बिदुआ के परिजनों ने बताया, "सालनी बचपन से देख नहीं सकती है। कृष्ण की भक्त होने के कारण सालनी हमेशा यही कहती थी कि मैं कृष्ण से ही शादी करूंगी। इसीलिए इस शादी का निर्णय लिया गया।"

वहीं, टीकमगढ़ के रहने वाले महेंद्र प्रताप सिंह (45 वर्ष) अपने परिवार के साथ ओरछा जा रहे थे। मगर जब उन्होंने बारात देखी तो वे भी खुद को रोक न सके। वह भी बारात में शामिल हो गए। पूछने पर उन्होंने कहा, "मैं बारात देखकर रुक गया। मैंने पूछा तो बारातियों ने पूरी बात बताई। मुझे विश्वास नहीं हुआ और पूरा परिवार बारात में शामिल हो गया।"

महेंद्र ने बताया, "जैसे ही बारात दुल्हन के घर पहुंची तो सालनी के परिजन व रिश्तेदारों ने मंगलगीत के साथ कृष्ण की मूर्ती का द्वारचार टीका किया। फिर जयमाला हुआ। नेत्रहीन सालनी ने कृष्ण की मूर्ति को वरमाला पहनाई और आशीर्वाद कार्यक्रम हुआ। विधि-विधान से फेरे पूरे कराए गए और विवाह सम्पन्न हो गया।"

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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