ब्रज में बसंत पंचमी से शुरू हो जाएगी होली

  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • koo
ब्रज में बसंत पंचमी से शुरू हो जाएगी होलीब्रज की होली होती है सबसे खास।

मथुरा (भाषा)। मथुरा, वृन्दावन सहित ब्रज के सभी तीर्थस्थलों में होली की तैयारियां शुरु हो गई हैं और बसंत पंचमी के दिन से यहां होली शुरु हो जाएगी।

परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ब्रज के सभी मंदिरों एवं चौराहों पर (जहां होली जलाई जाती है), होली का प्रतीक लकड़ी का टुकडा गाड़ दिया जाता है। उसके बाद मंदिरों में प्रतिदिन होली के शास्त्रीय गीतों पर आधारित समाज गायन प्रारंभ हो जाता है।

बांके बिहारी मंदिर के राजभोग अधिकारी प्रणव गोस्वामी एवं गोपी गोस्वामी के अनुसार एक फरवरी को बसंत पंचमी के दिन होली का आगाज हो जाएगा।

ब्रज में इस बार बरसाने की लट्ठमार होली फाल्गुन शुक्ला नवमी यानी छह मार्च को तथा नन्दगांव में सात मार्च को मनाई जाएगी। 13 मार्च को होलिका दहन वाले दिन फालैन तथा जटवारी गाँव में पण्डे धधकती होली में से निकलेंगे। फालैन में इस बार यह परंपरा निभाने का अवसर बाबूलाल पण्डा (47) को मिला है। बाबूलाल पूर्व में दो बार प्रहलाद की भूमिका निभाते हुए यह परंपरा निभा चुके हैं। इससे पूर्व दो साल से हीरालाल यह भूमिका निभाते चले आ रहे थे।

बृज महोत्सव की शुरूआत

इस महोत्सव की शुरुआत 1997 में कमला नगर से की गई थी। संघ के कुछ स्वयं सेवकों द्वारा छोटे स्तर पर महोत्सव तैयार किया गया, जिसमें कुछ हिंदू परिवार शामिल हुए। राधा के साथ कृष्ण, बलराम की झांकियां निकलती थीं। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे और आयोजन होली के साथ समाप्त हो जाया करता था, लेकिन आज यह आयोजन बेहद बड़ा हो चुका है।

बरसाने की बाखर में होती है होली

ब्रज महोत्सव की शुरुआत होलिका दहन वाले दिन से होती है। इस आयोजन में कमला नगर को बरसाना और बल्केश्वर को नंदगांव बनाया जाता है। नंद गांव से कृष्ण बलराम के साथ नंद बाबा की शोभायात्रा निकलती है तो वहीं बरसाने से राधा जी का डोला और वृषभान की शोभाया़त्रा निकलती है।

पांच कुंतल के फूलों से होती है होली

बरसाने की बाखर में संस्कार भारती के बैनर तले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। जिसमें कमला नगर और बल्केश्वर क्षेत्र के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाती हैं। इसके अलावा आकर्षण का केन्द्र रहता है, यहां खेले जाने वाली फूलों की होली। राधा कृष्ण के मयूर नृत्य के बाद पांच कुंतल फूलों से होली खेली जाती है।


  

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.