एमसीटीएस में लापरवाही स्वास्थ्य विभाग को पड़ेगी भारी

एमसीटीएस में लापरवाही स्वास्थ्य विभाग को पड़ेगी भारीफोटो साभार: इंटरनेट

उन्नाव। मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (एमसीटीएस) के तहत प्रतिरक्षण कार्यक्रम की फीडिंग में अब लापरवाही का खामियाजा स्वास्थ्य विभाग के लिए भारी पड़ सकता है। जिम्मेदारों द्वारा लगातार बरती जा रही लापरवाही के बीच अब शासन ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। नए फैसले के तहत यदि फीडिंग गलत होगी तो वार्षिक बजट में कटौती कर दी जाएगी।

फीडिंग में लापरवाही बरतने और 35 फीसद से कम एंट्री होने पर अब जननी सुरक्षा योजना के वार्षिक बजट में पांच प्रतिशत की कटौती की जा सकती है। बजट में कटौती के साथ जननी सुरक्षा योजना के क्रियान्यवन पर सीधा असर पड़ सकता है। मदर एंड चाइल्ड टै्रकिंग सिस्टम के तहत स्वास्थ्य विभाग ऑनलाइन जच्चा बच्चा की सेहत पर नजर रखता है। गर्भवती महिलाओं को लगने वाले टीके के साथ उनकी जांच और प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत बच्चों को लगने वाले टीकों का ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज किया जाता है।

जच्चा-बच्चा के इस रिकार्ड पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की हर पल नजर रहती है। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साअधिकारी के साथ ही ऑपरेटर की जिम्मेदारी रहती है कि वह बुधवार और शनिवार को होने वाले टीकाकरण सत्र की समय से फीडिंग करें। शासन की ओर से इस संबध में कई बार कड़े दिशा निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं बावजूद इसके फीडिंग में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। एमसीटीएस पोर्टल पर फीडिंग में बरती जा रही लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जा रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि अगर अब प्रतिरक्षित बच्चों की एंट्री में लापरवाही बरती जाएगी तो इसके लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी के साथ ही ऑपरेटर जिम्मेदार होंगे। वहीं पैतिस फीसदी से कम एंट्री पर जननी सुरक्षा योजना के बजट में कटौती की जाएगी। प्रतिरक्षण कार्यक्रम का डेटा कम होने पर पांच फीसद तक बजट में कटौती करने की चेतावनी दी गई है। इसका सीधा असर योजना पर पड़ सकता है।

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