रेशम के 8500 साल पुराने होने के सबूत चीन की कब्रों में मिले 

रेशम के 8500 साल पुराने होने के सबूत चीन की कब्रों में मिले फोटो प्रतीकात्मक है।

बीजिंग (भाषा)। शोधकर्ताओं को चीन की करीब 8,500 साल पुरानी कब्रों में रेशम पाये जाने के प्रमाण मिले हैं। रेशम पाये जाने के इन नये प्रमाणों से लगता है कि हजारों साल पहले भी लोग रेशम से बने आलीशान वस्त्रों आदि का इस्तेमाल करते रहे होंगे।

इससे पहले भी वैज्ञानिकों ने इस स्थान में हड्डी से बनी बांसुरी का पता लगाया था। जो अभी तक धरती का ज्ञात सबसे पुराना वाद्य यंत्र है। चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पुरातत्व वैज्ञानिक डेचाई गोंग ने बताया कि वैज्ञानिकों ने मध्य चीन के हेनान प्रांत के जिआहू में पाए जाने वाले करीब 9,000 साल पुराने खंडहरों का अध्ययन किया। चीन की पुरानी कहानियों में भी इस इलाके में रेशम के कीड़ों के प्रजनन और रेशम बुनाई के प्रसंग पाए जाते हैं।

जिआहू पर किये गये पुराने शोध में पाया गया कि इस इलाके की गर्म और आर्द्र जलवायु शहतूत के पेड़ों के लिए अनुकूल है, जो रेशम के कीड़ों के लिए एकमात्र खाद्य सामाग्री है।

वैज्ञानिकों ने जिआहू की तीन कब्रों के मृदा नमूने भी एकत्रित किए, जिसके बाद रसायन वैज्ञानिकों ने यहां की तीन में से दो कब्रो में रेशम प्रोटीन पाये जाने के बारे में बताया, इसमें से एक कब्र तो करीब साढ़े आठ हजार साल पुरानी है।

गोंग ने ‘लाइव सांइस' को बताया, ‘‘यह प्रचीन चीन में रेशम पाए जाने के सबसे पुराने प्रमाण हैं।'' शोधकर्ताओं ने बताया कि इससे पहले चीन में करीब 5,000 साल पहले रेशम पाए जाने के प्रमाण मिले थे।

इससे पहले शोध वैज्ञानिकों को हड्डी से बनी सुइयां एवं बुनाई के उपकरण मिले थे, जिसे पता चलता था कि यहां के लोग बुनाई और सिलाई जैसे कार्यों में पारंगत थे और शायद मृतकों को उनके रेशमी वस्त्रों के साथ कब्रों में दफना दिया गया होगा।


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