सैलानी पक्षियों को रास नहीं आया इस बार नवाबगंज का पक्षी बिहार

सैलानी पक्षियों को रास नहीं आया इस बार नवाबगंज का पक्षी बिहारपक्षियों का दल नहीं ठहर रहा नवाबगंज पक्षी बिहार में। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

श्रीवत्स अवस्थी

नवाबगंज (उन्नाव)। पक्षी बिहार का वातावरण इस बार विदेशी मेहमानों को भा नहीं रहा है। झील में पानी की कमी मेहमान परिंदों के लिए मुसीबत बनी हुई है। नहर में पानी न आने से झील का आधे से अधिक हिस्सा चारागाह की जमीन में तब्दील हो गया है। नतीजतन, अनुकूल वातावरण न मिलने से विदेशी मेहमानों ने इस बार नवाबगंज पक्षी बिहार झील को अलविदा कह दिया है।

नवाबगंज को छोड़ पक्षी बढ़े आगे

मौसम अनुकूल न मिलने के कारण हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पक्षी बिहार पहुंचने वाले मेहमान उचित स्थान की तलाश में आगे बढ़ चले हैं। उधर विदेशी मेहमानों के झील में प्रवास न करने से उनका कलरव नहीं सुनाई दे रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को सिर्फ देशी पक्षियों की चहलकदमी ही देखने को मिल रही है।

यह है सैलानी पक्षियों का सालाना रूटीन

नवाबगंज पक्षी बिहार हर वर्ष श्रीलंका, चीन, जापान, साइबेरिया, रूस व अलास्का जैसे सुदूर देशों के परिंदो की उपस्थिति का गवाह बनता रहा है। अक्टूबर माह के आखिरी सप्ताह से विदेशी मेहमानों के यहां आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। यह सिलसिला नवंबर माह के दूसरे सप्ताह तक चलता है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर यहां आने वाले मेहमान झील व उसके आसपास अपना घर बनाते हैं। लगभग पांच माह तक यहां रुकने के बाद जब मौसम में तापमान में गर्मी बढ़ती है तो वह दोबारा अपने देश को लौट जाते हैं।

आसीवन ब्रांच नहर सूखी तो झील हुआ उजाड़

नवाबगंज पक्षी बिहार की झील व ठंड का मौसम विदेशी मेहमानों के रहने के लिए पूरी तरह से अनुकूल रहता है लेकिन इस बार झील में पानी की कमी विदेशी मेहमानों को भा नहीं रही है। आसीवन ब्रांच नहर में पानी न आने से झील का आधे से अधिक हिस्सा सूखा पड़ा है। इस वजह से अक्टूबर माह के अंत में जब विदेशी मेहमानों की यहां दस्तक शुरू हुई तो पानी की कमी की वजह से उन्होंने यहां रुकना पसंद नहीं किया। अनुकूल परिस्थतियों की तलाश में विदेशी मेहमान नवाबगंज पक्षी बिहार को अलविदा कहकर किसी अन्य स्थान की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं। पक्षी बिहार की झील का जो नजारा इस वर्ष है यही नजारा पिछले वर्ष भी रहा था। नवंबर माह तक झील में पानी नहीं पहुंचा था, जिससे विदेशी मेहमान से यहां उड़ चले थे। प्रशासन को जब मामले की जानकारी हुई थी तो उसने ट्यूबवेल के जरिए झील में पानी भराया था।

कामन कूट, गैडवाल व पिनटेल ने दी दस्तक

लद्दाख की पहचान गैडवाल, साइबेरिया की पिनटेल, श्रीलंका की कॉमन कूट ने अक्टूबर माह के अंत में नवाबगंज पक्षी बिहार में अपनी दस्तक दे दी थी। कई झुंड में पहुंचे इन परिंदो ने यहां अपना डेरा भी बना लिया है। लेकिन मौसम अनुकूल न होने से पक्षी बिहार पहुंचे यह विदेशी मेहमान अब झील को छोडक़र किसी अन्य स्थान को जाने को मजबूर हो रहे हैं।

एक माह में तीन दिन मिला पानी

रेंज अधिकारी यशवंत सिंह ने बताया, "पिछले माह में तीन दिन नहर से पानी मिला था। झील में पानी भरने के लिए एक डीप बोर कराया जा चुका है। वहीं दो डीप बोरिंग कराई जा रही हैं। जिसके बाद पानी भरा जाएगा।" उन्होंने बताया, "15 नवंबर तक पक्षी आते हैं। जिसकी वजह से उनके पास समय और वह पानी भर लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 6 हेक्टेयर में पानी मौजूद है।"

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