सामाजिक न्याय प्रदान करने की जमीनी हकीकत निराशाजनक : अंसारी

सामाजिक न्याय प्रदान करने की जमीनी हकीकत निराशाजनक : अंसारीहामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

बेंगलूरु (भाषा)। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मंगलवार को कहा कि देश में कल्याण संबंधी कानून बनाए जाने और कदम उठाए जाने के 70 साल बाद भी सामाजिक न्याय प्रदान करने की जमीनी हकीकत निराशाजनक है।

उन्होंने कहा, ‘‘सामाजिक न्याय के मामले में हम कहां खड़े हैं ? सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए कल्याण संबंधी कानून बनाए जाने और कदम उठाए जाने के 70 साल बाद भी यह एक सवाल है जो गणराज्य के लोग राज्य से पूछ सकते हैं।'' अंसारी ने यहां भारतीय अधिवक्ता संगठन के नौवें राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन संबोधन में कहा, ‘‘जमीनी हकीकत निराशाजनक है।''

उन्होंने न्यू वर्ल्ड वेल्थ कंपनी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत विश्व में 12वीं सबसे बडी असमान अर्थवयवस्था है जहां 45 प्रतिशत संपत्ति धन कुबेरों द्वारा नियंत्रित है।

वित्तीय एजेंसी ‘क्रेडिट सुइस' द्वारा प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा कि भारत की कुल संपत्ति में से लगभग आधी संपत्ति सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों के हाथों में है, जबकि शीर्ष 10 प्रतिशत के हाथों में इसका करीब 74 फीसद हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस बीच, सबसे गरीब 30 प्रतिशत लोगों के पास कुल संपत्ति का केवल 1.4 प्रतिशत ही है।''

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