पर्यावरण में जहर घोल गए दीवाली के पटाखे

पर्यावरण में जहर घोल गए दीवाली के पटाखेफोटो: गाँव कनेक्शन

एटा। खुशियों की दीवाली पर चलने वाले करोड़ों रुपये कीमत के पटाखे पर्यावरण में जहर घोल गए। पटाखों के धुएं और शोर से जिले में सोमवार को प्रदूषण के स्तर में 10 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ है। हालांकि प्रदूषण के आंकड़े महानगरों के मुकाबले कम बढ़ोत्तरी दिखा रहे हैं, लेकिन जिले के लिहाज से प्रदूषण की स्थिति खतरनाक है।

ये कहते हैं आंकड़े

ध्वनि प्रदूषण

  • दिवाली से पहले- 85 से 95 डेसिबल
  • दिवाली के बाद- 120 से 150 डेसिबल
  • मानक- 100 डेसिबल तक

दिवाली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। इस बार प्रदूषण में 10 फीसद इजाफा दर्ज हुआ है। ध्वनि प्रदूषण 15 डेसिबल से बढ़कर 150 डेसिबल तक पहुंचा जबकि वायु प्रदूषण में सस्पेंडेड पार्टिकल्स और मैटर की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई। मात्रा 94 से बढ़कर 120 तक पहुंच गई। हालांकि बड़े महानगरों के मुकाबले आंकड़े बेहद कम प्रदूषण दर्शा रहे हैं, लेकिन बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। मानकों के मुताबिक सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा सस्पेंडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। अलीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. केपी सिंह बताते हैं, “मानक से अधिक स्थिति प्रदूषण दिवाली पर हर साल होती है। लोगों को इससे परहेज के लिए जागरूक होने की जरूरत है।”

पर्यावरण संरक्षण का रहा असर

पटाखों को लेकर जिले में पर्यावरण संरक्षण का असर भी नजर आया। लोगों ने तेज आवाज और धुआं वाले पटाखों से परहेज किया। पटाखा कारोबार पर चाइना उत्पादों के बहिष्कार का असर साफ नजर आया।

बढ़ा बीमारियों का खतरा

पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। आईएमए अध्यक्ष डा. राजेश सक्सेना ने कहा बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा, ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं।

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