जंगलों में रहने वालों को जमीन देने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार कर रही सरकार 

जंगलों में रहने वालों को जमीन देने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार कर रही सरकार जुआल ओरम, केन्द्रीय जनजाती कार्य मंत्री 

नई दिल्ली (भाषा)। सरकार जंगलों में रहने वालों को भूमि अधिकार देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ग्रामसभा बैठकों के कोरम की संख्या को कम करने पर विचार कर रही है जो वन अधिकार कानून के तहत भूमि विलेख के लिए ग्रामीणों के दावों पर विचार करता है।

जनजातीय और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार मान्यता) नियम के अनुसार इस तरह के दावों पर सुनवाई करने के वास्ते कोरम बनाने के लिए ग्राम सभा के 50 प्रतिशत सदस्य मौजूद होने चाहिए। जनजातीय मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘कोरम बनाना अक्सर कठिन होता है जिससे ग्रामीणों को उस वन जमीन को देने की प्रक्रिया में देरी होती है जिस पर वे पारंपरिक रुप से निर्भर हैं। इसके अतिरिक्त, प्रक्रिया में असल दावेदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए यह महसूस किया गया कि कोरम की संख्या को घटाया जाना चाहिए।''

जब 2007 में नियम बनाए गए थे तब कोरम के लिए ग्राम सभा के कुल सदस्यों की दो तिहाई संख्या जरुरी थी। इस तरह कोरम की बैठक अक्सर मुश्किल हो जाती थी। सितंबर 2012 में कोरम की संख्या को घटाकर 50 प्रतिशत करने के लिए नियम में संशोधन किया गया। जनजातीय और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार मान्यता) कानून के तहत पारंपरिक वन निवासी उस भूमि का वन अधिकार पाने के लिए दावे करते हैं जिस पर वे पारंपरिक रुप से निर्भर हैं।

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