... ताकि पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा फिर कायम हो सके

... ताकि पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा फिर कायम हो सकेगाँव कनेक्शन अख़बार ने अपनी बैलेंस शीट हर साल सार्वजनिक करने का लिया फैसला।

लखनऊ। पत्रकारिता में ईमानदारी और नैतिकता वापस लाने के एक प्रयास में गाँव कनेक्शन ने आज अपनी बैलेंस शीट सार्वजिनक कर दी। इस दस्तावेज़ के ज़रिए कोई भी व्यक्ति ये जान सकता है कि संस्थान चलाने का खर्च कितना है और ये पैसा कहां से आ रहा है।

बैलेंस शीट के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 में गाँव कनेक्शन संस्थान का कुल खर्च 01 करोड़ 45 लाख 98 हज़ार रुपए है। इस दौरान संस्थान द्वारा अपने संसाधनों से जुटाया गया राजस्व लगभग 89 लाख 29 हज़ार रुपए रहा जो अख़बार की बिक्री और विज्ञापन जैसे माध्यमों से आया।

अख़बार के निदेशक व संस्थापक नीलेश मिसरा ने गाँव कनेक्शन की बैलेंश शीट जारी करते हुए कहा, "ये जानना पाठकों का अधिकार है कि किसी अख़बार को चलाने का पैसा कहां से आता है और उसका मालिक कौन है? आज के पेड न्यूज़ के दौर में मीडिया संस्थानों पर उठ रहे तमाम सवालों का जवाब देने और साथ ही पाठकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए ये ज़रूरी है"।

गाँव कनेक्शन की वर्ष 2014-15 और 2015-16 की बैलेंस शीट।

गाँव कनेक्शन की बैलेंस शीट से यह भी पता चलता है कि संस्थान ने खुद से जुटाए गए राजस्व के अलावा अपने खर्चों को पूरा करने के लिए 'कॉन्टेंट प्रोजेक्ट' कंपनी और नीलेश मिसरा से सम्मिलित रूप से लगभग 75 लाख 20 हज़ार रुपए का लोन लिया।

'कॉन्टेंट प्रोजेक्ट', नीलेश मिसरा व यामिनी त्रिपाठी की कंपनी है जिसकी आय का मुख्य स्रोत फिल्म व टेलीविज़न कॉन्टेंट बनाने के साथ ही तमाम अन्य क्रियेटिव प्रोजेक्टस हैं।

गाँव कनेक्शन को वर्ष 2015-16 में कहां से मिला कितना पैसा।

बैलेंस शीट के साथ ही नीलेश ने संस्थान को जारी किये गए ऑडिटर की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की है। उन्होंने कहा कि मीडिया के काम-काज में पारदर्शिता लाने की ओर बढ़ाए गए अपने इस कदम के बाद गाँव कनेक्शन आशा करता है कि अन्य मीडिया संस्थान भी इस दिशा में आगे आएंगे।

दो दिसम्बर 2012 से शुरू हुए गाँव कनेक्शन संस्थान के मुख्यत: तीन अंग हैं जिनमें साप्ताहिक अंक, दैनिक अंक और न्यूज़ वेबसाइट शामिल है। अपने इन माध्यमों के ज़रिए गाँव कनेक्शन हर महीने भारत के लाखों लोगों तक पहुंचता है।

देश की 70 फीसदी आबादी जो गाँवों में रहती है उसके मुद्दों का प्रतिनिधित्व करने वाला गाँव कनेक्शन संस्थान पत्रकारिता के सबसे बड़े सम्मान कई बार प्राप्त कर चुका है। साल 2012 में एडिटोरियल डायरेक्टर नीलेश मिसरा व एसोसिएट एडिटर मनीष मिसरा को व साल 2014 में गाँव कनेक्शन की वरिष्ठ पत्रकार अनु सिंह चौधरी को रामनाथ गोएनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गाँव कनेक्शन के प्रधान संपादक डॉ एसबी मिसरा को साल 2012 में राज्य व राष्ट्र स्तर पर दो बार व रिपोर्टर श्र‍ृंखला पाण्डेय को साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र समर्थित लाडली मीडिया पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गाँव कनेक्शन के प्रमुख संवाददाता भास्कर त्रिपाठी को ब्रिटिश फॉरेन प्रेस एसोसिएशन व थॉमसन फाउंडेशन ने साझा तौर पर साल 2014 के लिए विकासशील देशों कें सर्वश्रेष्ठ 12 पत्रकारों में चुना था।

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