लखनऊ: गोमती बैराज में पड़ी दरारें, ध्वस्त होगा पुल

लखनऊ: गोमती बैराज में पड़ी दरारें, ध्वस्त होगा पुलढहाया जा रहा गोमती बैराज का पुल। फोटो: गाँव कनेक्शन।

लखनऊ। गोमती बैराज पुल को पूरी तरह से ध्वस्त करने का काम अब शुरू हो चुका है। सिंचाई विभाग के अफसरों की लापरवाही से इस पुल के किनारे पर बना बाढ़ नियंत्रण कक्ष पहले ढह गया था। जिसके चलते इस पुल को करीब एक महीने पहले बंद कर दिया गया था। मगर अब यहां मरम्मत हो पाएगी, इसकी संभावना बहुत कम है। पुल में दरारें बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब इसके ध्वस्तीकरण का काम दूसरे किनारे से शुरू कर दिया गया है।

गोमती बैराज पुल की खुदाई, तुड़ाई शुरू की गई है। फन मॉल से बैराज की रोड को आनन-फानन में महकमे ने तोड़ना शुरू किया है। गोमती बैराज के दूसरी तरफ के हिस्से में भी दरार आ गयी है। बैराज के दूसरे किनारे पर बने कार्यालय के सामने भी मोटी दरार पड़ी हैं। यह भी किसी वक्त ढह सकता है। इसके नीचे भी अण्डर पास बनाया जा रहा है। इसके ढहने से सिंचाई विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ था। मगर अब ये नुकसान कई गुना बढ़ेगा, दरअसल पूरा पुल ही नये सिरे से बनाना होगा।

दोनों तरफ की रोड का धंसना तय

सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि गोमती के किनारे जिस हिस्से से मिट्टी निकालकर अण्डर पास बनाया जा रहा है, वहां तक बैराज का पुल नहीं है। अण्डर पास पुल के हिस्से से हटकर बाढ़ नियंत्रण कार्यालय के नीचे से बनाया जा रहा रहा है। अण्डर पास के लिए नीचे खुदायी कर मिट्टी निकाल ली गयी है। इसके नीचे प्री फैब्रिकेटेड दीवार अन्दर बनायी जा रही है। अण्डर पास की छत व रोड की जमीन के बीच काफी गैप हो गया है। मिट्टी निकलने से यह खाली हो गया है। लिहाजा यह ध्वस्त हो गया।

यह सब होना पहले से तय था। अब बैराज रोड भी टूटेगी। इसीलिए इसे बंद कराया गया है। इस काम में करीब एक साल का समय लगेगा।
रुप सिंह यादव, अधीक्षण अभियन्ता, सिंचाई विभाग

कम से कम पुल बनने में लगेगा एक साल

इसके गिरने की वजह से बैराज रोड का एक साल तक बंद रहना तय है। अब सिंचाई विभाग को बैराज रोड को नए सिरे से ही बनाना होगा क्योंकि नीचे से काफी मिट्टी निकल चुकी है, जिससे यह खोखला हो गया है। सिंचाई विभाग के इंजीनियर जहां दो वर्ष से बैठते थे, वहीं का काम नहीं देख पाए। ऊपर वह कार्यालय में बैठकर काम कर रहे थे और नीचे से उनके कार्यालय की नींव हिलायी जा रही थी। जिस नन्दा एण्ड कम्पनी को इसका काम दिया गया था, वह कैसे व क्या काम कर रही है, इसे अधिकारी देखने तक नहीं गए। खुद अधीक्षण अभियन्ता दो वर्षों से यहीं बैठते थे, उन्होंने ही यहां अपना कार्यालय व मीटिंग रूम बनवा रखा था। वह भी नहीं बच सका। अब जब हादसा हो गया है तो वह कह रहे हैं कि इसे तो ढहना ही था।

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