क्या सिर्फ कैसरबाग बस अड्डे से नाम कमाएगी सरकार ?

क्या सिर्फ कैसरबाग बस अड्डे से नाम कमाएगी सरकार ?कैसरबाग बस अड्डे पर चल रहा नवीनीकरण कार्य। 

रायबरेली से किशन, चित्रकूट से प्रभाकर सिंह, बाराबंकी से सतीष और वीरेन्द्र, कन्नौज से हासिमः कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ। एक तरफ राजधानी के कैसरबाग बस अड्डे को आधुनिक बस अड्डा बनाने की कवायद शुरू हो गई है वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के कई जिलों के बस अड्डों पर मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, जिससे यात्रियों को बहुत असुविधा होती है।

लखनऊ के कैसरबाग बस अड्डा प्रदेश का ही नहीं बल्कि देश का सबसे आधुनिक बस अड्डा बनने जा रहा है। इस बस अड्डे को अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जहां आम जनता से लेकर दिव्यांगों का भी पूरा ख्याल रखा जा सकेगा।

वहीं रायबरेली के बछरावां बस अड्डे पर प्रतिदिन सैंकड़ों बसों के आना-जाना है। लखनऊ ही नहीं दिल्ली तक की बसों का स्टाप है तो बनारस, इलाहाबाद जाने वाले बसों के मुसाफिर भी काफी संख्या में होते हैं। बस अड्डे को नरक बस अड्डा नाम देने वाली सुमन मिश्रा (38 वर्ष) जो शिक्षिका हैं वो बताती हैं, “हर जगह तो केवल गंदा पानी भरा रहता है। मैं रोज आती-जाती हूं।” स्नातक की छात्रा रुचि अवस्थी (19 वर्ष) रोज निगोहा से आती-जाती हैं। रुचि बताती हैं, “बस अड्डे पर महिला प्रसाधन की कोई व्यवस्था नहीं है। केवल एक सुलभ शौचालय बना है।”

रायबरेली के सभी बस अड्डों के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है बछरावां का प्रस्ताव पास भी हो चुका है। बरसात खत्म होते ही वहां कार्य शुरू कराया जाएगा और सभी अव्यवस्थाएं दूर की जाएंगी।
आरपी सिंह, रायबरेली के एआरएम

कन्नौज के बस अड्डे की भी यही स्थिति है। वहां के बस अड्डों में महिलाओं के लिए शौचालय तो बने हैं, लेकिन दरवाजे टूटे हुए हैं ऐसे में महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। जहां कैसरबाग बस अड्डे को वर्ल्ड क्लास की श्रेणी में लाने के लिए अड्डे को फुल एयर कंडीशनर बनाया जाएगा। साथ ही दिव्यांगों के लिए खासतौर पर बस स्टॉप पर लिफ्ट भी लगाई जाएगी। इसके साथ-साथ कई सामान्य क्षेणी के पैसेंजर, वाल्वो व प्रीमियर बसों के पैसेजरों के लिए अलग-अलग आधुनिक वेटिंग रूम का निर्माण किया जा रहा है।

चित्रकूट बस अड्डे पर यात्रियों के पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही बसों का लेट-लतीफ होना आम बात है। यात्री शेड मे गंदगी का अम्बार लगा रहता है। कई जिलों में जहां बस अड्डों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। वहीं उन्नाव और कानपुर में बस स्टैंड की स्थिति को काफी सुधारा गया है यहां शौचालय से लेकर ठंडे पानी की उचित सुविधा है। साथ ही साफ-सफाई कर भी काफी ध्यान रखा जाता है।

बाराबंकी के बस अड्डे पर नहीं है साफ़-सफाई

वर्षों से नहीं हुई बाराबंकी बस अड्डे की सफाई

बाराबंकी बस स्टाप पर पान की गुमटी लगाने वाले मुन्ना बताते हैं, “उन्हें अक्सर लखनऊ आना-जाना रहता है एक तो सबसे बड़ी समस्या गंदगी की है दूसरी समस्या पीने वाले पानी की है, जहां लगता है वर्षों से सफाई ही नहीं करवाई गयी है।” ढकौली गाँव निवासी हरीराम शुक्ला यात्रियों से जुड़ी समस्या गिनाते हुए बताते हैं साहब क्या-क्या समस्या हम बताएं खुद सामने आप देख लो बाद में वो यहां की समस्याएं गिनवाने में जुट गए।

उन्होंने कहा वो अक्सर बहराइच और फैजाबाद जाते रहते हैं सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोई भी बस बाराबंकी जिले से सीधे न तो बहराइच जाती है और न ही फैजाबाद। उन्हें बस स्टाप से पांच किलोमीटर दूर सागर इंस्टीट्यूट तक मोटर साइकिल से छोड़ने परिवार के लोग जाते हैं। हाईवे से बस मिलती है रात में जब उधर से वापस लौटते हैं तो बस वाले बस स्टाप बाराबंकी नहीं आते वो उधर से लखनऊ के लिए निकल जाते हैं।

बस स्टाप के पास की जर्जर हो चुकी सड़क पर अक्सर पानी भरा रहता है पानी का कोई निकास नहीं है। बस स्टाप के पास ही ममता मेडिकल स्टोर के मालिक मनोज वर्मा बताते है, “बस की समस्याएं भी बहुत हैं क्योंकि यात्रियों को बसों में जगह नहीं मिलती यात्री बसों के लिए घंटों लाइन में लगे रहते हैं।” टिकट सेक्शन व स्ट्रांग रूम इंचार्ज प्रभारी शीलमणि मिश्रा ने जानकारी बताते हुए बताया, “नया बस स्टाप 2.207 हेक्टेयर एरिया में बन रहा है, जहां सारी सुविधाएं मिलेंगी।” उन्होंने बताया ये पुराना बस स्टाप 1380 वर्ग मीटर में बना है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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