राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा, प्रजापति को कैबिनेट में बनाए रखने का क्या औचित्य 

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा, प्रजापति को कैबिनेट में बनाए रखने का क्या औचित्य गायत्री प्रजापति पर है बलात्कार का आरोप, एक पखवाड़े से हैं फरार।

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बलात्कार के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति को कैबिनेट में बनाये रखने का रविवार को औचित्य जानना चाहा।

राजभवन के एक प्रवक्ता के मुताबिक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर एक महिला तथा उसकी नाबालिग पुत्री के साथ अपने साथियों सहित सामूहिक दुष्कर्म के आरोप को संज्ञान में लिया। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। राज्यपाल ने कहा, ‘‘इस प्रकार के मंत्री के कैबिनेट में बने रहने तथा उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से लोकतांत्रिक शुचिता, संवैधानिक मर्यादा और संवैधानिक नैतिकता का गंभीर प्रश्न उत्पन्न होता है।’’

प्रवक्ता के मुताबिक पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री प्रजापति के कैबिनेट में बने रहने के औचित्य पर अपने अभिमत से उन्हें जल्द से जल्द अवगत कराएं। नाईक ने कहा कि मीडिया में आयी खबरों के अनुसार फरार चल रहे कैबिनेट मंत्री के विदेश भाग जाने की आशंका को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके खिलाफ ‘लुक आउट’ नोटिस जारी किया है। पासपोर्ट अधिकारी द्वारा उनका पासपोर्ट भी निलंबित कर दिया गया है। प्रजापति के राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए कथित रुप से किया गया अपराध नितांत गंभीर प्रकृति की घटना है।

भाजपा की सरकार बनते ही गायत्री होंगे सलाखों के पीछे : अमित शाह

अंबेडकरनगर (भाषा)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही बलात्कार के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।

शाह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा, ‘‘गुनाहगारों का गिरेबान पकड़ो, आपसे नहीं होगा अखिलेश, ना करना हो तो ना करो। 11 मार्च को भाजपा की सरकार बनेगी तो हम गायत्री प्रजापति को पाताल से भी ढूंढकर सलाखों के पीछे डाल देंगे।’’

उन्होंने कहा कि प्रदेश की पुलिस ने अखिलेश के खासम खास गायत्री के खिलाफ बुंदेलखंड की एक माता और बेटी के बलात्कार के आरोप पर एफआईआर नहीं दर्ज की। मां बेटी को उच्चतम न्यायालय जाना पड़ा और शीर्ष अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गयी।


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