विश्व संगीत समागम बनने की ओर एक और कदम बढ़ाता तानसेन संगीत समारोह  

विश्व संगीत समागम बनने की ओर एक और कदम बढ़ाता तानसेन संगीत समारोह  तानसेन संगीत समारोह के कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड।

ग्वालियर (भाषा)। नार्वे की एनी हॉयत के वायलिन से जब मधुर स्वरलहरियां निकलीं तो भारत के प्रतिष्ठित संगीत आयोजनों में शामिल तानसेन संगीत समारोह ने विश्वसंगीत के समागम की ओर एक और कदम बढ़ाया।

तानसेन संगीत समारोह में इस साल एनी के साथ बेल्जियम की मारग्रेट हमेंर्ट, इस्राइल के जोहर इजाक फ्रेस्को, स्विट्जरलैंड के मेथिस बोएग्नर और इराक के ओसामा अब्दुलरसूल ने भी शिरकत की और संगीत-प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।

इस प्रतिष्ठित संगीत समारोह में विश्वसंगीत के साथ तबले की जुगलबंदी, ध्रुपद के सुर और रद्रवीणा, सरोद, बांसुरी एवं सारंगी से निकलते स्वरों की मिठास ने भी मौसिकी के मुरीदों को बांधकर रखा।

गत 16 दिसंबर को हरिकथा और मिलाद के साथ शुरू हुए समारोह का समापन आज तानसेन की साधना स्थली गाँव बेहट में और शहर के गूजरी महल में आयोजित प्रस्तुतियों के साथ होना है। पिछले करीब नौ दशक से आयोजित हो रहा तानसेन संगीत समारोह इसके आयोजकों के अनुसार शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ने के साथ साथ वैश्विक रूप लेता जा रहा है।

मध्य प्रदेश संस्कृति मंत्रालय की कला परिषद के सहायक निदेशक राहुल रस्तोगी के अनुसार पिछले साल से समारोह में अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की आमद शुरू हुई जिसे इस वर्ष भी जारी रखा गया।

इस प्रतिष्ठित समारोह को धीरे धीरे विश्व संगीत समागम बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खा संगीत और कला अकादमी तथा मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल द्वारा समारोह का आयोजन किया गया है।
राहुल रस्तोगी सहायक निदेशक मध्य प्रदेश संस्कृति मंत्रालय की कला परिषद

समारोह में उस्ताद अमजद अली खां का सरोद वादन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जो शास्त्रीय संगीत की इसी धरती पर जन्मे हैं और देश, विदेश में भारतीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके साथ ही शाश्वती बागची (कोलकाता), विशाल जैन (इलाहाबाद), कमलेश तिवारी (भोपाल), शोभा चौधरी (इंदौर), सुहास व्यास (पुणे) और मनु श्रीवास्तव (अमेरिका) समेत कई कलाकारों ने ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध ध्रुपद गायकी से तानसेन की संगीत साधना को श्रद्धांजलि दी।

कला परिषद के सहायक निदेशक रस्तोगी के अनुसार 1924 से उपलब्ध दस्तावेजों से यह बात प्रमाणित होती है कि इस वर्ष तानसेन संगीत समारोह का 92वां आयोजन है।

उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते हुए समारोह के आयोजन में कई बदलाव किए गए हैं जिनमें इसकी मियाद तीन दिन से बढ़ाकर पांच दिन की गई है और इसका कलेवर भी बदला गया है। रस्तोगी के अनुसार ग्वालियर की जनता और संगीत-रसिकों की आकांक्षाओं को देखते हुए भी सरकार की जिम्मेदारी इस समारोह को और व्यापक रुप प्रदान करने की बन जाती है।

उन्होंने कहा कि इसी क्रम में इस साल कुछ नए पहलू जोड़े गए हैं, जिसमें समारोह की पूर्वसंध्या पर ‘गमक' नामक आयोजन शामिल है जिसमें लोक गायिका मलिनी अवस्थी की प्रस्तुति हुई।

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