जाट आंदोलन : मांगों पर विचार के लिए हरियाणा सरकार ने समिति बनायी  

जाट आंदोलन : मांगों पर विचार के लिए हरियाणा सरकार ने समिति बनायी  मुख्य सचिव डी एस धेसी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की है

चंडीगढ़ (भाषा)। जाट आंदोलन के दसवें दिन भी समुदाय को अपनी मांगों से डिगता हुआ नहीं देख, हरियाणा सरकार ने मुख्य सचिव डी एस धेसी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति राज्य में आरक्षण व अन्य मुद्दोंं को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों की समस्याओं का समाधान करेगी।

यहां एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘कोई संगठन, समाज का तबका या कोई व्यक्ति अपना विचार और सलाह लिखित या मौखिक रूप में समिति को सौंप सकता है। समिति संविधान व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में सुनाए गए विभिन्न फैसलों और निर्देशों के दायरे में रहते हुए मुद्दों को सुलझाने का सर्वोत्तम प्रयास करेगी।’ उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के दायरे में रहते हुए प्रदेश के लोगों की समस्याएं सुलझाने के पक्ष में है।

समिति के चार अन्य सदस्य हैं- अपर मुख्य सचिव (गृह) राम निवासी, प्रधान सचिव (उद्योग) देवेन्द्र सिंह, सचिव (सामान्य प्रशासन) विजयेन्द्र कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) मोहम्म्द अकील।

प्रदेश में फिलहाल चल रहे जाट आंदोलन के मद्देनजर उपसंभागीय अधिकारी (दीवानी) तोहाना, ने नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे सभी जेसीबी ऑपरेटरों के साथ बैठक करें और उन्हें चेतावनी दें कि यदि आंदोलन के दौरान जेसीबी का प्रयोग पेड़ उखाडने और सड़क खोदने के लिए किया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और वाहन जब्त कर लिए जाएंगे।

प्रदेश में सुरक्षा इंतजाम काफी कड़े कर दिए गए हैं। इस बीच अधिकारियों का कहना है कि जाटों ने प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर धरना दिया। सभी जगह शांति रही।

गौरतलब है कि राज्य में मुख्य विपक्षी दल इनेलोद ने दो दिन पहले ही जाटों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है और सरकार से उनकी बातें सुनने और मांगे मानने को कहा है।

ये हैं आंदोलनकारियों की मांगें

आंदोलनकारियों की मांग है कि केंद्र और राज्य की नौकरियों में जाटों को आरक्षण दिया जाए, फरवरी 2016 के आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवार वालों और घायलों को मुआवजा दिया जाए। मारे गए लोगों के आश्रितों को नौकरी दी जाए, दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं, दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, भाजपा सांसद राजकुमार सैनी के भाषण की जांच के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द की जाए और आंदोलन के दौरान जेल भेजे गए जाटों को रिहा किया जाए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पहले ही कह चुके हैं कि सरकार ने आंदोलन में मारे गए लोगों के निकटतम परिजन को नौकरी देने की मांग स्वीकार कर ली है और उसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

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