पीरियड्स को लेकर फैली अफवाहों का #स्वयंफ़ेस्टिवल में दिया गया जवाब

पीरियड्स को लेकर फैली अफवाहों का #स्वयंफ़ेस्टिवल में दिया गया जवाबहोम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आंचल कौशल ने महिलाओं और छात्राओं से खुलकर बात की।

शाहजहांपुर। जनपद के श्री सत्यपाल सिंह महाविद्यालय में स्वयं फेस्टिवल के तहत पेटीएम को लेकर जागरूकता दी गई और महिलाओं को हाईजीन व माहवारी के समय होने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी दी गई।

पीरियड्स का मतलब अशुद्ध होना नहीं

तेरह साल की मीना (काल्पनिक नाम) नहीं जानती थी कि माहवारी में खुद को सुरक्षित कैसा रखा जाए। मगर शनिवार को उसके स्कूल में आयोजित स्वयं फेस्टिवल में महिलाओं को दिए गए हेल्थ टिप्स ने उसकी बहुत मदद की। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अथिति मौजूद होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आंचल कौशल ने महिलाओं और छात्राओं से खुलकर बात की। उनके हर सवाल का जवाब दिया। स्वस्थ रहने के लिए उन्हें नित्यक्रिया में किए जाने वाले आवश्यक बदलावों के बारे में भी बारीकी से समझाया। उन्होंने माहवारी के समय महिलाओं के अशुद्ध होने आदि के बारे में फैली भ्रांतियों के बारे में भी खुलकर बताया। उन्होंने कहा, “यह सब गलत है। यह कहना भी गलत है कि लड़कियों की माहवारी शुरू होने के बाद उनकी लंबाई नहीं बढ़ती है। यह सिर्फ आपके खाने-पीने और ज़िंदगी जीने की शैली पर ही आधारित होता है।”

वहीं, कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं ने कई बीमारियों के बारे में जानकारी पाने के साथ ही डॉ. आंचल कौशल द्वारा बताई गई दवाओं के बारे में भी जानकारी हासिल की। पूनम (काल्पनिक नाम) ने पूछा, “माहवारी के समय सिर पर नहाना चाहिए या नहीं।” इसके जवाब में डॉ. आंचल ने कहा, “हर रोज साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए। ऐसा न करने पर ही दिक्कत होती है। साफ-सुथरा रहने से कभी भी दिक्कत नहीं होती।”

कैशलेस ज़िदगी के बारे में खरीदारी का जाना तरीक़ा

वहीं, पेटीएम की आयोजित कार्यशाला में लोगों को बताया गया कि किस तरह से वे नोटबंदी के बाद आई समस्याओं को भूलकर खरीदारी कर सकते हैं। कई लोगों ने इस बीच पेटीएम एप्प डाउनलोड करके कैशलेस ज़िंदगी को जीने की शुरुआत की। इस अवसर पर मौजूद रहे 18 वर्षीय विकास ने कहा, “मैंने स्वयं फेस्टिवल में शामिल होकर पेटीएम के बारे में खासी जानकारी हासिल की। यह जानकर अच्छा लगा कि जेब में कैश रखे बिना भी खरीदारी की जा सकती है।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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