‘अग्निपरीक्षा’ में लखनऊ के कई अस्पताल फेल, कहीं टूटे पड़े हैं पाइप तो कहीं वायरिंग का मकड़जाल

‘अग्निपरीक्षा’ में लखनऊ के कई अस्पताल फेल, कहीं टूटे पड़े हैं पाइप तो कहीं वायरिंग का मकड़जालराजधानी के लोहिया अस्पताल में नहीं दिखाई देते अग्निशमन यंत्र।

लखनऊ। एक चिंगारी भर उठेगी और राजधानी के अस्पताल और नर्सिंग होम कुछ उसी तरह से आग का गोला बन जाएंगे, जैसे ओेडिशा में सोमवार की रात हुआ। भुवनेश्वर के एक अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से 23 लोगों की मौत के बाद राजधानी में अस्पतालों के प्रबंधन के लिए एक चेतावनी है। राजधानी के अस्पतालों में कहीं खुले तार तो कहीं एसी सिस्टम की गड़बड़ियां तो कहीं अग्निशमन यंत्र गायब हैं। वहीं, राजधानी में ही संकरी गलियों में कई नर्सिंग होम फलफूल रहे हैं। वहीं, ओडिशा की दर्दनाक घटना के बाद अब सीएमओ का कहना है कि बहुत जल्द ही सभी अस्पतालों को निर्देश जारी कर के इंतजामों को दुरुस्त कराने के लिए कहा जाएगा।

क्वीन मेरी में वायरिंग का मकड़जाल

क्वीनमेरी अस्पताल में एयरकंडीशन के खुले पड़े हैं तार।

क्वीन मेरी अस्पताल में लगे एयर कंडीशन और वायरिंग का हाल बेहाल है। सोमवार को एसी में ही शार्ट सक्रिट होने से बड़ा हादसा हुआ था। बीते एक साल से इन एसी को बदलने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन अभी तक एसी बदले नहीं गए हैं। अस्पताल प्रशासन उन्हीं पुराने और जर्जर एसी और खराब वायरिंग से काम चला रहा है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस बारे में वरिष्ठ प्रसूति रोग विशेषज्ञ और एसी इंचार्ज यशोधरा का कहना है कि पुराने एसी बदले जा रहे हैं। एक वार्ड में दो एसी लगे हैं और सब एसी काम कर रहे है। छोटे बच्चों की वजह से ऐसी नहीं चलाया जाता।

चौपड़ अस्पताल अग्निशमन मानकों को भूला

चौपड़ अस्पताल में खुली पड़ी है वायरिंग।

नवल किशोर रोड स्थित चौपड़ अस्पताल में अग्निसुरक्षा से बचने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं हैं। न तो यहां की वायरिंग ठीक है और न ही आग पर काबू पाने का कोई यंत्र। इस अस्पताल में कई बार शार्ट सर्किट होने के काले निशान दीवारों पर मौजूद हैं। जर्जर वायरिंग और टूटे हुए इलेक्ट्रिक पैनल यहां कोई भी बड़ा हादसा कर सकते हैं। हादसों से बचने के लिए यहां कोई भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगे।

चौपड़ अस्पताल में खुली पड़ी है वायरिंग।

केजीएमयू और लोहिया में हर ओर गड़बड़ियां

लोहिया अस्पताल में खुले पड़े मेन सिस्टम।

केजीएमयू में आग लगने की वजह पुरानी वायरिंग है। छह अगस्त को पैथोलॉजी में आग लगने की वजह भी शार्ट सर्किट ही था, जिसमें हजारों की संख्या में सैम्पल खराब हो गए थे। इससे पहले भी वायरिंग के चलते हादसे हो चुके हैं। एक साल से पुरानी वायरिंग को बदलने का काम हो रहा है, लेकिन अब भी यह पूरा नहीं हो सका है। लोहिया अस्पताल में आग बुझाने वाले यंत्र का पाइप और दरवाजे गायब हैं। वहीं बाहर की तरफ तार बिछे पड़े हैं। इससे कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोहिया में अगर आग लग जाती है तो जब तक वह पाइप ढूढ़ेंगे, तब आग फैल चुकी होगी।

रेड क्रास अस्पताल: 2006 में ही एक्सपायर हो चुके हैं अग्निशमन यंत्र

रेड क्रास अस्पताल में 2006 में ही एक्सपायर हो चुके हैं अग्निशमन यंत्र।

रेड क्रॉस अस्पताल में अग्निशमन यंत्र 2006 में एक्सपायर हो चुके हैं। 2006 से न तो इन इस अस्पताल में यह भरे गए और न ही इस ओर किसी आलाधिकारी का ध्यान गया। ऐसे में यदि इस अस्पताल में आग जैसी घटना होती है तो यह अस्पताल सिवाय लाचारी के कुछ नहीं कर पाएगा।

झलकारी बाई में हो चुका अग्निकांड

एक साल पहले झलकारी बाई के फर्स्ट फ्लोर के एसएनसीयू और लिम्ब सेंटर के थर्ड फ्लोर पर डाक्टर ड्यूटी रूम में भयंकर आग लगी थी। ऐसे हादसों से सबक न लेते हुए भी राजधानी में कई सरकारी और गैरसरकारी अस्पताल ऐसे है, जहां इन हादसों से बचने के कोई उपाय मौजूद नहीं है।

सभी अस्पतालों को निर्देशित किया जाएगा कि वे दमकल इंतजामों को दुरुस्त कर दें। इसके अलावा अग्निशमन विभाग इसकी जांच करेगा। जहां भी कमी मिली, वहां कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सत्येंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी

सभी अस्पतालों में आग को लेकर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सभी अस्पतालों में चेकिंग चल रही है। किसी अस्पताल में खामियां पाई गयी तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य चिकित्साधिकारी, एसएनएस यादव

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