भारत के इस गाँव में नहीं जा सकते हैं भारतीय पुरुष

भारत के इस गाँव में नहीं जा सकते हैं भारतीय पुरुषकसोल गाँव का एक दृश्य।

लखनऊ। भारत के हर गाँव की अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं ही हैं, जो उन्हें अलग बनाती हैं। मगर भारत का एक गाँव ऐसा भी है, जहां पर भारतीय पुरुषों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। अगर भारतीय पुरुष गाँव में आ भी गए तो उन्हें ठहरने के लिए कोई भी ग्रामीण कमरा किराये पर नहीं देता है। ऐसे में उन्हें मजबूरन गाँव से बाहर का रास्ता देखने पड़ता है। जानते हैं यह गाँव कहां है? भारत में यह गाँव है हिमाचल प्रदेश के पास और इस गाँव का नाम है कसोल गाँव।

इस गाँव में रहते हैं विदेशी

कसोल गाँव में बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं इस्रायली सैलानी।

हिमाचल प्रदेश के कसोल गाँव में अधिकतर विदेशी रहते हैं। यह विदेशी इस्रायली हैं, जो पिछले 20 वर्षों से कसोल गाँव में पर्यटक के रूप में आते हैं। यह गाँव इस्रायल से आने वाले सैलानियों के लिए पहली पंसद है। इस्रायल से सेना में ट्रेनिंग लेने के बाद कसोल गाँव में इतनी बड़ी संख्या में इस्रायल से सैलानी आते हैं, तब ऐसा लगता है कि जैसे यह इस्रायल का ही एक गाँव हो। मजेदार बात यह है कि किसी भी समय इस पर्वतीय घाटी में कम से कम एक हजार इस्रायली मिल सकते हैं।

आखिर क्यों है भारतीय पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध

किसी भी समय इस गाँव में मिल जाएंगे इस्रायली।

कसोल गाँव में भारतीय पुरुषों को आने नहीं दिया जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि चूंकि इस गाँव में बड़ी संख्या में इस्रायली विदेशी आते हैं और वे उनसे छेड़खानी करते हैं। ऐसे में इस्रायली महिलाओं की यात्रा में खलल पहुंचता है। इस वजह से इस गाँव के लोग भारतीय पुरुषों को गाँव में प्रवेश नहीं करने देते हैं।

इसलिए पसंद है इस्रायलियों को यह गाँव

कसोल गाँव में एक कैफे में बैठे विदेशी।

असल में हिमाचल प्रदेश के मनाली में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद जब मनाली अपना प्राकृतिक रूप खोने लगा तब इस्रायली पर्यटक एकांत की तलाश में पार्वती घाटी के पास पहुंचे। इस घाटी के पास इन्होंने कसोल गाँव की ओर रुख किया। इस्रायली नागरिकों का दावा है कि उन्होंने तकरीबन दो दशक पहले इस गाँव को खोजा था। यहां पहुंचने के बाद आपको ऐसा लगेगा कि आप भारत में नहीं, बल्कि किसी विदेशी गाँव में हैं।

ग्रामीणों को मिला रोजगार

कसोल गाँव का एक दृश्य।

इस गाँव में ज्यादातर इस्रायली सैलानियों के आने के कारण ग्रामीणों ने यहां कैफे और गेस्ट हाउस खोले। ग्रामीणों ने सैलानियों को अपने यहां जगह दी। यहां ग्रामीणों की मानें तो भारतीयों के आने से इतनी कमाई नहीं होगी, जितनी विदेशी लोगों से होती है। ऐसे में गाँव के लोगों का रोजगार बढ़ा तो ग्रामीणों ने इन विदेशी लोगों का साथ दिया।

कसोल गाँव की कुछ और रोचक बातें

  • इस गाँव में बोली जाने वाली भाषा हिब्रू है।
  • कसोल गाँव में एक भी गाड़ी नहीं थी।
  • मात्र 300 रुपये प्रतिदिन के किराये पर इस गाँव में ठहरने की व्यवस्था हो जाती है।
  • इस गाँव के आस-पास इस्रायली झंडे भी नजर आते हैं।
  • गाँव में एक यहूदी पुजारी को इस्रायल से भेजा गया, जो यहूदियों की पूजा करने में मदद करता है।
  • नमस्कार की जगह यहां पर लोग ‘शलोम’ बोलते हैं।

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