गणित का सवाल: कक्षा में कितनी गोरी लड़कियां?

Ashish DeepAshish Deep   4 Jan 2017 5:50 PM GMT

गणित का सवाल: कक्षा में कितनी गोरी लड़कियां?आईएससी बोर्ड सिखा रहा बच्चों को भेदभाव।

लखनऊ। अगर किसी कक्षा में 80 छात्रों में 55 छात्र और 25 छात्राएं हैं। उनमें 10 फेयर काम्प्लेक्शन (साफ रंग) वाले और 25 धनी हैं तो फेयर काम्प्लेक्शन वाली लड़कियों की प्रायिकता (प्रोबेबिलिटी) क्या होगी? यह सवाल हमारा नहीं बल्कि आईएससी की इंटर गणित की एक किताब में पूछा गया है जो रंगभेद को बढ़ावा देता है। किताब का नाम ‘आईएससी मैथ्स 2014’ है।

समाज में रंगभेद तोड़ने के लिए अलग-अलग प्रयास हो रहे हैं। सरकार स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर इस हीन भावना को बढ़ाने वाली सोच से लड़ रही है। लेकिन स्कूल की किताबों में इससे जुड़े सवाल एक गंभीर खामी है। सेल्फ-रेगुलेटरी संस्था एड्वर्टाइजिंग स्टेंडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) की ‘कोड-बुक’ चैप्टर-3, 1 बी में धर्म, जाति, नस्ल या रंग के आधार पर टिप्पणी करने की मनाही है।

प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल विकास) रेणुका कुमार का कहना है, “आईएससी मैथ्स 2014 में पूछे गए सवाल के विषय में जो भी आपत्ति है, उसे हमारे कार्यालय भेजा जाए। हम संबंधित विभाग को यह आपत्ति प्रेषित करेंगे ताकि वह आगे कार्रवाई कर सके"

जब इस बारे में एस चांद पब्लिकेशंस के लखनऊ स्थित कार्यालय पर (0522-4065646) संपर्क किया गया तो वहां एक कर्मचारी ने बताया कि सवाल के संबंध में कोई भी आपत्ति है तो उसके लिए किताब में दिए लेखक के पते पर संपर्क किया जाए। इस बारे में सेंट जोसफ स्कूल के निदेशक अनिल अग्रवाल ने बताया, “बच्चों में बैर बढ़ाने वाली भावना की शिक्षा देना गलत है। जिस भी प्रकाशक ने इसे छापा है उसे इस पहलू पर गौर करना चाहिए और अगर कहीं ऐसी आपत्तिजनक सामग्री मिले तो उसे किताब से हटा देना चाहिए।”

आईएससी मैथ्स 2014 में पूछे गए सवाल के विषय में जो भी आपत्ति है, उसे हमारे कार्यालय भेज दें। हम संबंधित विभाग को यह आपत्ति प्रेषित करेंगे ताकि वह आगे कार्रवाई कर सके।”
रेणुका कुमार, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास

क्या कहते हैं डाक्टर

त्वचा विशेषज्ञ डॉ. अबीर सारस्वत का कहना है, "रंगभेद गंभीर मुद्दा है। समाज में इसे रोकने के लिए तरह-तरह के प्रयास हो रहे हैं। मेरे पास दर्जनों ऐसे मरीज आते हैं जो पूछते हैं कि गोरा कैसे हुआ जाए। इनमें युवक-युवतियां दोनों शामिल हैं। युवतियां कहती हैं कि गोरे हो जाएंगे तो हमें जल्द नौकरी मिल जाएगी।" डॉ. सारस्वत का कहना है कि इंटर के बच्चों की किताब में ऐसा सवाल आपत्तिजनक है। इसे तुरंत किताब से हटाया जाना चाहिए। हमें बच्चों में रंगभेद या अमीर-गरीब की भावना आने से रोकना होगा।

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