बीजेपी को वोट नहीं देंगे प्रदेश के एक लाख कोटेदारों के परिवार

बीजेपी को वोट नहीं देंगे प्रदेश के एक लाख कोटेदारों के परिवारप्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। प्रदेश के एक लाख कोटेदारों और उनके परिवार के लोग भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देंगे। बीजेपी का बहिष्कार करने का फैसला कोटेदारों ने किया है। कोटेदार संघ का आरोप है कि केंद्र सरकार ने केरोसिन यानी मिट्टी के तेल के कोटे में लगातार कटौती करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य तरह की परेशानियों का भी सामना राशन डिपो वालों को करना पड़ रहा है।

गुपचुप तरह से बढ़ाया जा रहा दाम

दारूलशफा बी-ब्लॉक कॉमन हाल में उत्तर प्रदेश फेयर शॉप डीलर एसोसिएशन के प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और प्रभारियों की बैठक हुई। बैठक में उचित दर विक्रेताओं की नौ सूत्रीय मांगों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही समस्याओं को लेकर पदाधिकारियों ने कई निर्णय लिये। एसोसिएशन के महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने बैठक में कहा कि केन्द्र सरकार ने पिछले तीन महीनों से मिट्टी का तेल कटौती करके 50 प्रतिशत कर दिया है। प्रत्येक महीने 50 पैसे प्रति लीटर केरोसिन का दाम भी गुपचुप तरीके से बढ़ाया जा रहा है। केन्द्र सरकार की मंशा है कि राशन विक्रेताओं को समाप्त कर दिया जाय। कोटेदारों के साथ केन्द्र सरकार के सौतेला व्यवहार को लेकर प्रदेश के एक लाख राशन विक्रेता परिवारों ने संकल्प लिया है कि उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा का बहिष्कार कर विरोध जतायेंगे। राशन विक्रेताओं द्वारा भाजपा हटाओ, कोटा बचाओ का अभियान गाँव-गाँव स्तर पर किया जाएगा।

शासन ने नहीं उठाया कोई ठोस कदम

बैठक को सम्बोधित करते हुये उत्तर प्रदेश फेयर शॉप डीलर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री और खाद्य रसद मंत्री, आयुक्त खाद्य रसद को उचित दर विक्रेताओं की मांगो को लेकर कई बार ज्ञापन दिया। जिस पर शासन ने कोई ठोस निर्णय आज तक नहीं लिया। मांगो को लेकर कोटेदार पिछले माह 16 सितम्बर को लक्ष्मण मेला मैदान में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। जिसमें शासन की तरफ से प्रशासनिक अधिकारी ने ज्ञापन लेने के साथ आश्वासन दिया था कि कोटेदारों की समस्याओं के लिये एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री से वार्ता कराने की बात कही थी। इसके बावजूद भी उचित दर विक्रेताओं की मांगों पर कोई निर्णय नहीं हुआ। मांगों का समाधान न होने को लेकर प्रदेश के आक्रोशित कोटेदार सभी जिलों में माल गोदामों से खाद्य सामग्री उठान बन्द कर वितरण कार्य अनिश्चितकालीन हड़ताल 21 अक्टूबर से प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय एवं सरकारी गोदामों पर प्रदर्शन करने को बाध्य हो गये हैं। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मदारी शासन/प्रशासन की होगी।

तो करेंगे विधानसभा का घेराव

बैठक में ऐसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेन्द्र मिश्र ने कहा कि सरकारी मिट्टी के तेल फुटकर लाईसेंसियों को राशन की दुकानों के रूप में समायोजित करने का अनुरोध किया गया है।ऐसोसिएशन के उपाध्यक्ष जयदेव यादव ने कहा कि राशन विक्रेताओं की मांग 10 दिन के अन्दर नहीं मानी गयी तो इस बार बिना किसी सूचना के विधानसभा का घेराव करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन/प्रशासन की होगी। बैठक में मुख्य रूप से ऐसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मुन्नीलाल गुप्त, शिवनाथ यादव, हरसू सिंह, राजकुमार सिंह, अनिरु( सिंह, पदमाकर समेत सैकड़ों प्रदेश के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कोटेदारों की प्रमुख मांगे :-

1.कोटेदारों को मानदेय रु० 25000/- दिया जाय व कमीशन झारखण्ड व छत्तीसगढ़ की भांति दिया जाये।

2. उप्र आवश्यक वस्तु (विक्रय एवं वितरण के विनियम) आदेश 2016 में किसी प्रकार का संशोधन न किया जाय।

3.वर्ष 2001 से अब तक का डोर स्टेप डिलीवरी का भुगतान तत्काल प्रभाव से दिलवाया जाय व वर्तमान में घटतौली मुक्त डोर स्टेप डिलीवरी दिलायी जाय।

4. मध्यान्ह् भोजन का विगत वर्षों के किराये का भुगतान कराया जाय तथा वर्तमान का भुगतान भी साथ ही दिया जाय।

5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना 2013 के अन्तर्गत वसूली की व्यवस्था दे दी गयी है। अतएव राशन दुकानों पर लगने वाली धारा-3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम मा. मुलायम सिंह की सरकार में स्थगित कर दिया गया था। पुन: बसपा सरकार द्वारा लागू कर दिया गया, इस सरकार में पुन: स्थगित किया जाय।

6. उप्र की अधिकांश आबादी आज भी गांव में निवास करती है, जहाँ बिजली की आपूर्ति अत्यन्त कम हैं। अत: मिट्टी के तेल का प्रदेश का कोटा बढ़ाये जाने हेतु सुविचारित कदम उठायें जायें व पूर्व की भांति 3 लीटर प्रति कार्ड दिया जाय।

7. खाद्य सुरक्षा में एकल व्यवस्था व एक ही विभाग से सत्यापन व वितरण कराया जाय। कई विभाग से कराने से शोषण की सम्भावना रहती है।

8. निलम्बित दुकानें बहाल की जाय व राशन विक्रेताओं पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जाएं।

9. आधार कार्ड लिकिंग की व्यवस्था व कार्ड वितरण व्यवस्था से दूर रखा जाए।

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