जयललिता की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई हार्ट अटैक से नहीं

जयललिता की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट से हुई हार्ट अटैक से नहींतमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को श्रद्धा सुमन अर्पित करते राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी।

लखनऊ। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का रविवार शाम को अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट (हार्ट बीट रुकना) से सोमवार रात 11.30 बजे निधन हो गया। पर जनता में यह बात फैल गई कि जयललिता की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई है। पर मेडिकल टर्म में कार्डियक अरेस्ट (हार्ट बीट रुकना) और हार्ट अटैक (दिल का दौरा) दोनों अलग हैं।

कार्डियक अरेस्ट: कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अचानक ही ब्लड का सर्कुलेशन बंद कर देता है। इससे सांस नहीं आती है और इंसान बेहोश हो जाता है और सही समय पर इलाज न मिलने पर कोमा में चला जाता है। और मृत्यु भी हो सकती है। जिन लोगों को हार्ट अटैक की प्रॉब्लम होती है, उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा और भी बढ़ जाता है।

कार्डियक अरेस्ट के इलाज के लिए मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है, जिससे उसकी उसकी हृदयगति को नियमित किया जा सके। मरीज को 'डिफाइब्रिलेटर' से बिजली का झटका दिया जाता है, जिससे दिल की धड़कन को नियमित होने में मदद मिलती है।

हार्ट अटैक: हार्ट अटैक में अचानक ही हार्ट की किसी मसल में ब्लड सर्कुलेशन बंद हो जाता है, जिससे हार्ट को स्थायीतौर पर डैमेज होता है। लेकिन हार्ट की इस सिचुएशन में भी बॉडी के दूसरे हिस्सों में ब्लड का सर्कुलेशन ठीक तरीके से होता है। इस सिचुएशन में इंसान केवल बेहोश रहता है।

धमनियों में आए इस तरह के आई ब्लॉकेज को दूर करने के लिए कई तरह के उपचार किए जाते हैं, जिनमें एंजियोप्लास्टी, स्टंटिंग और सर्जरी शामिल हैं, और कोशिश होती है कि दिल तक खून पहुंचना नियमित हो जाए। इसमें पीड़ित के बचने की संभावना काफी रहती है।

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