मंत्री गायत्री फरार, पुलिस लाचार, अमेठी स्थित आवास पर भी छापा

मंत्री गायत्री फरार, पुलिस लाचार, अमेठी स्थित आवास पर भी छापाएक कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव के पैर छूते गायत्री प्रजापत। (फाइल फोटो)

मुख्य संवाददाता

लखनऊ। अमेठी में बलात्कार के आरोपी कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के आवास पर लखनऊ पुलिस छापा मारने के लिए पहुंची मगर मंत्री यहां से भी गच्चा देकर निकल गए। पुलिस फिर से हाथ मलती रह गई। पुलिस ने इससे पहले गायत्री के लखनऊ में माल एवेन्यू स्थित सरकारी आवास पर छापा मारा था। गायत्री वहां भी नहीं मिले थे। दूसरी ओर राजधानी पुलिस इस मामले में मीडिया को बरगलाने में लगी हुई है। इस कार्यवाही को लेकर पुलिस कुछ भी सीधा बयान देने से मुकर रहे हैं।

गायत्री प्रसाद प्रजापति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा हुए करीब 10 दिन बीत चुके हैं। इस मामले में पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के सामने हो गये हैं। इसके बावजूद गायत्री को पकड़ने की कोशिश अब तक नाकाफी हैं। सबसे पहले दो दिन पहले लखनऊ में गायत्री के सरकारी आवास पर पुलिस ने छापा मारा था। जहां वे पुलिस को नहीं मिले। एक दिन के लिए पुलिस ने आराम किया। इसके बाद में बुधवार की दोपहर में एक बार फिर से पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस अमेठी में गायत्री के आवास पर पहुंची। मगर वहां भी पुलिस की कवायद नाकाफी ही रही और पुलिस के हाथ में गायत्री नहीं आ सके।

गैंग रेप के आरोपित कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति की तलाश में राजधानी पुलिस जुटी हुई है हालाकि यह कितना सच है य झूठ यह बात सभी को पता है पर फिर पुलिस के अधिकारी मंत्री के खिलाफ साक्ष्य जुटाने व तेजी से कार्यवाई करने की बात कह रहे हैं। बुधवार को दिन भर मंत्री के अमेठी में गिरफ्तार किये जाने की चर्चा रही पर एसएसपी के पीआरओ अरूण कुमार सिंह ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नही आयी है राजधानी पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

तो नौ मार्च की सुबह गिरफ्तार किये जाएंगे गायत्री?

दूसरी ओर पुलिस के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि, नौ मार्च को गायत्री की औपचारिक गिरफ्तारी होगी। सूत्रों का कहना है कि गायत्री अब पुलिस की जद में आ चुके हैं। मगर इसको औपचारिक नहीं किया जा रहा है। मगर मतदान का अंतिम चरण समाप्त होने के बाद ही उनकी गिरफ्तारी शो की जाएगी।

भाजपा ने कहा, बलात्कार के आरोपियों को बचा रही सपा

भाजपा के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि बलात्कार के आरोपियों पर अखिलेश सरकार की रहमदिली से प्रदेश में अपराधियों के हौसलों बुलंद हुए है। सरकार की लड़कों से गलतियां हो जाती हैं वाली नीतियों का परिणाम है कि अखिलेश सरकार की नीयत पर सवाल उठ रहा है। मामूली धाराओं में गरीब आदमी को तत्काल जेल भेजने को आतुर यूपी पुलिस दुष्कर्म जैसी संज्ञेय धाराओं में एफआईआर होने के बावजूद आरोपियों पर नरम रूख अख्तियार किये है।

पाठक ने कहा कि दुष्कर्म के मामले में एफआईआर के दस दिन बाद भी अखिलेश सरकार के मंत्री गायत्री गिरफ्तारी में यूपी पुलिस के हाथ कांप गये। जबकि एफआईआर दर्ज होने होने के बाद भी अखिलेश यादव उनके लिए प्रचार करने गए और आंखो से आंसू बहाते गायत्री चुनाव प्रचार करते रहे। यही नहीं मुख्यमंत्री के करीबी सुल्तानपुर के सपा विधायक अरूण वर्मा पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती की हत्या हो जाती है, लेकिन अब तक बलात्कार से आहत न्याय व्यवस्था आरोपी विधायक को सीखचों में देखने के इंतजार में आंसू बहाती रहती है। वहीं डा0 अयूब के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में एफआईआर के चार दिन बाद भी पीड़िता के परिवारीजनों के बयान न लेना और साक्ष्य न जुटाना यह साबित करता है कि पुलिस अयूब को गिरफ्तार नहीं करना चाहती है।

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