वर्ष 2016 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने की अहम नीतिगत बदलावों की तैयारी 

वर्ष 2016 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने की अहम नीतिगत बदलावों की तैयारी केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू।

नई दिल्ली (भाषा)। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वर्ष 2016 में फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया, एक नई सूचना एवं संचार नीति जैसे प्रमुख नीतिगत बदलावों की तैयारी जारी रखी और अब उसे उम्मीद है कि ये बदलाव इस साल मूर्त रुप लेंगे।

वर्ष 2017 के लिए प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर सूचना और प्रसारण मंत्री एम वैंकेया नायडू ने कहा कि सूचना एवं संचार नीति लाना और फिल्म प्रमाणन पर काम करना उनकी बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। मंत्रालय डीएवीपी के जरिए सरकारी विज्ञापनों को जारी करने में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक नई प्रिंट मीडिया नीति भी लेकर आया। साल के मध्य में मंत्रालय के शीर्ष पद पर बदलाव हुआ और वित्तमंत्री अरुण जेटली के स्थान पर नायडू ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रभार संभाला।

वर्ष 2016 की शुरुआत में अरुण जेटली ने फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया की समीक्षा के लिए दिग्गज निर्देशक श्याम बेनेगल के नेतृत्व में एक समिति के गठन की घोषणा की। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट जमा कराई। इसमें एक ऐसी व्यवस्था की पैरोकारी की गई, जिसमें ज्यादा श्रेणियां हों और सेंसरशिप कम हो। इस रिपोर्ट के बाद मंत्रालय एक विधेयक पर काम कर रहा है। विधेयक को इस साल संसद के समक्ष रखा जा सकता है।

पिछले वर्षों की तरह फिल्म प्रमाणन बीते साल भी एक विवादित मुद्दा बना रहा और फिल्म ‘उड़ता पंजाब' में लगाए गए कटों को लेकर बड़ा विवाद पैदा हुआ। इस साल मंत्रालय सूचना एवं संचार नीति को अंतिम रुप देने से पहले उसपर विमर्श भी कर सकता है। नायडू की ओर से इस पहलू को मजबूत समर्थन मिला है।

वर्ष 2016 में टीवी मीडिया के नियमन से जुड़े पहलू पर व्यापक बहस हुई। इसकी पृष्ठभूमि प्रमुख तौर पर यह रही कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी खबर चैनल एनटीवी इंडिया पर पठानकोट आतंकी हमले पर उसकी कवरेज के लिए एक दिन के प्रतिबंध का आदेश दिया था। प्रसारक के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय के पदाधिकारियों से मुलाकात करके इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी। इसके बाद आदेश को रोक दिया गया था।

बीते साल, मंत्रालय ने सात साल के अंतराल के बाद राज्यों के सूचना मंत्रियों का एक सम्मेलन आयोजित किया। उसने पूर्वोत्तर राज्यों में सामुदायिक रेडियो स्टेशन लगाने के लिए सब्सिडी को 50 फीसदी से बढ़ाते हुए 90 फीसदी कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों के लिए इस सब्सिडी को बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया। इसकी अधिकतम सीमा 7.5 लाख रुपए रखी गई। मंत्रालय ने ‘कारोबार को सुगम बनाने’ के प्रयास के तहत मौजूदा टीवी चैनलों के वार्षिक नवीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने पर काम किया। जून 2014 से दिसंबर 2016 तक कुल 170 चैनलों को लाइसेंस दिए गए और इनमें से 25 खबरिया चैनल थे।

प्रसारण के तीसरे चरण के तहत एफएम रेडियो चैनलों के दूसरे बैच की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई और इसकी घोषणा इस साल होने की संभावना है। हाल में 92 शहरों में 266 चैनलों के लिए नीलामी आयोजित की गईं। चौथे चरण के क्रियान्वयन की समयसीमा दिसंबर 2016 थी लेकिन इसे विस्तार देकर 31 मार्च 2017 कर दिया गया।

ऑल इंडिया रेडियो ने बांग्लादेशी और बंगाली लोगों के लिए एक विशेष सेवा शुरु की। इसी के साथ जनता से जनता का संपर्क बढ़ाने के लिए एक बलूची मल्टीमीडिया और एक मोबाइल एप्प शुरु की गई। नए साल में पूर्वोत्तर के लिए एक नया दूरदर्शन चैनल आने की संभावना है।

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