जैव संवर्द्धन न तो सर्वसमाधान है और न ही बुराई: हर्षवर्धन 

जैव संवर्द्धन न तो सर्वसमाधान है और न ही बुराई: हर्षवर्धन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन।

नई दिल्ली (भाषा)। लोगों के लिए उत्कृष्ट और किसानों के लिए स्वीकार्य हल विकसित करने का वादा करने वाले विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन का कहना है कि जैव संवर्द्धन (जीन मॉडिफिकेशन) न तो कोई सर्वसमाधान है और न ही यह कोई बुराई है।

आगामी तीन जनवरी से सात जनवरी तक तिरुपति में होने जा रहे भारतीय विज्ञान कांग्रेस के आयोजन से पहले दिए साक्षात्कार में हर्षवर्धन ने विभिन्न मुद्दों पर बात की। इस आयोजन में लगभग 10 हजार वैज्ञानिकों के शिरकत करने की संभावना है।

साक्षात्कार के अंश इस प्रकार हैं-

क्या विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए प्राथमिकता बनी रहेगी?

विज्ञान और प्रौद्योगिकी सिर्फ सरकार के लिए सतत प्राथमिकता ही नहीं बल्कि पूरे देश के विकास और वृद्धि की धुरी भी है। प्रधानमंत्री ने हमारे वैज्ञानिकों के कार्य की हमेशा सराहना की है। वह नियमित रुप से वैज्ञानिकों से अपील करते रहे हैं कि वे भारत और विश्व के सामने मौजूद उर्जा, जल और जलवायु परिवर्तन से जुडी चुनौतियों को दूर करें।

इसके साथ-साथ उन्होंने जीवन की उत्पत्ति और ब्रह्मांड की प्रकृति जैसे मूलभूत सवालों पर अनुसंधान के महत्व को रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री ने अक्सर कहा है कि हालांकि विज्ञान सार्वभौमिक है, लेकिन प्रौद्योगिकी को स्थानीय होना चाहिए और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच के इस संपर्क को गतिशील एवं मजबूत होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने सिर्फ विज्ञान के लिए ही नहीं, बल्कि सभी मंत्रालयों के लिए एक अहम बिंदू पर जोर दिया है। यह बिंदू कहता है कि हमें अपने दायरों से बाहर निकलने की जरुरत है। मेरे वैज्ञानिक कई तरीकों से ऐसा कर रहे हैं।

क्या आप अपने मंत्रालय की दो-तीन बड़ी उपलब्धियां बता सकते हैं?

उपलब्धियों की एक बड़ी संख्या है। लेकिन कुछ के बारे में मैं बता देता हूं। ब्लॉक स्तर पर मौसम की भविष्यवाणी के लिए मेरे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने उच्च विभेदन क्षमता वाला वैश्विक मौसम पूर्वानुमान मॉडल तैयार किया है।

इसके साथ ही हमने मौसम संबंधी पूर्वानुमान लगाने के लिए अमेरिका में इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडल जैसी क्षमता हासिल कर ली है। नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के स्वतंत्र आकलन में निष्कर्ष निकाला गया कि चार प्रमुख फसलें (गेहूं, चावल, गन्ना और कपास) उगाने वाले किसानों के लिए वर्ष 2015 में GDP में वार्षिक आर्थिक लाभ 42 हजार करोड़ रुपए का था।

भारत गुरुत्वीय तरंगों की खोज में एक सक्रिय भागीदार रहा है और प्रधानमंत्री ने लेजर इंटरफेरोमेटरी ग्रेविटेशनल ऑब्जर्वेटरी (लीगो) के भारतीय हिस्से की घोषणा की है। भारत 30 मीटर के सबसे बड़े टेलीस्कोप के निर्माण में साझेदार है और उसके हिस्से यहां बनेंगे। हमारा सुपर कंप्यूटर अभियान शुरु हो चुका है और यह हमें वापस प्रमुख भूमिका में लेकर आएगा।

जलवायु में बदलाव और बीमारी के बावजूद उच्च स्तरीय उत्पाद देने वाली पशुओं की स्वदेशी नस्लों को विकसित करने के लिए पशु जीनोमिक्स कार्यक्रम शुरु किया गया है। इन क्षेत्रों के नव-विज्ञान में भारत के आगे बढने पर हम बेहद रोमांचित हैं।

आपकी राय में आपके विज्ञान मंत्री रहने के दौरान दो-तीन सबसे खराब विफलताएं क्या रही हैं?

विज्ञान में हम आत्म-आलोचक हैं और खुद से बहुत उम्मीदें रखते हैं। इसलिए मैं सबसे खराब विफलताएं जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहूंगा। जिन्हें आप विफलता कहते हैं, वे अनुभव की सीढ़ियां हैं और ये हमें उंचाई तक पहुंचने में मदद करती हैं। फिर भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें हम बहुत अच्छा कर सकते थे।

तीन विज्ञान विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय समाज के साथ संवाद करने में बेहतर हुए हैं लेकिन हमें अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। हमें संपूर्ण विज्ञान के लिए और हमारी सभी भाषाओं में एक साझा वेब पोर्टल विकसित करना चाहिए। यह कोई मामूली काम नहीं है लेकिन हमें इसे करना चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि हम वर्ष 2017 में इसे करेंगे।

हमारी प्रयोगशालाओं और संस्थानों को राष्ट्रीय परियोजनाएं अपने हाथ में लेने के लिए और उद्यमिता और नवोन्मेष को बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए एक दूसरे के साथ करीबी संपर्क बनाने चाहिए।

जैव प्रौद्योगिकी नियमन प्राधिकरण विधेयक को पारित करने की भारी जरुरत है। इसकी मौजूदा स्थिति क्या है और इसके कब तक लागू होने की उम्मीद की जा सकती है?

यह बात दुखद है कि पिछली संप्रग सरकार विधेयक को लाने के मुद्दे पर न सिर्फ अनिश्चित रही बल्कि उसके बारे में विरोधाभासी शब्दों में भी बोलती रही। इसके कारण अहम मुद्दों पर चर्चा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा है और इसका उपचार हमने पक्षकारों के साथ कई बैठकें करके किया है।

हमारे पास पहले ही एक उत्कृष्ट नियमन प्रणाली है और विधेयक के जिन गैर-स्थायी पहलुओं पर हम सहमत हैं, उन्हें हमने विज्ञान मंत्रालय और पर्यावरण और वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ लागू किया है।

जैसे-जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आगे बढ़ती है, हम उत्कृष्ट मानकों पर खरा उतरने के लिए अपने नियमन को आधुनिक बनाते जाते हैं। पूर्ण चर्चाओं के बाद हम जरुरत के अनुरुप विधेयक लेकर आएंगे।

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