नोटबंदी के क्रियान्वयन में भारी कुप्रबंधन, जीडीपी 2 फीसदी घटेगी : मनमोहन सिंह

नोटबंदी के क्रियान्वयन में भारी कुप्रबंधन,  जीडीपी 2 फीसदी घटेगी : मनमोहन सिंहदेश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह।

नई दिल्ली (आईएएनएस)| पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी से आम आदमी और छोटे कारोबारियों को कठिनाई हो रही है और देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दो फीसदी तक लुढ़क सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले के क्रियान्वयन में भारी कुप्रबंधन हुआ है।

नोटबंदी से 60 से 65 लोगों को गई जान

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि वह किसी ऐसे देश का नाम बताएं, जहां लोगों ने बैंक में अपने पैसा जमा कराए हैं लेकिन वे उसे निकाल नहीं सकते।" सिंह ने कहा, "नोटबंदी के क्रियान्वयन में भारी कुप्रबंधन हुआ है। मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए व्यावहारिक तरीके ढूंढ़ने में मदद करेंगे। इस दौरान 60 से 65 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है।"

जीडीपी में दो फीसदी की गिरावट आएगी

उन्होंने कहा, "यह जो कुछ भी हुआ है उससे देश की जीडीपी में लगभग दो फीसदी की गिरावट आएगी। यह आंकड़ा अनुमान से अधिक नहीं बल्कि कम ही है। सरकार के इस फैसले से हमारे देश के लोगों का मुद्रा और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास कम हुआ है।" उन्होंने कहा कि नोटबंदी से जो क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित हुए हैं वे छोटे कारोबारी, खेती और सहकारी बैंकिंग है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा कि कृषि, असंगठित क्षेत्र और लघु उद्योग नोटबंदी के फैसले से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लोगों का मुद्रा एवं बैंकिंग व्यवस्था पर से विश्वास खत्म हो रहा है।

व्यावहारिक, रचनात्मक और तथ्यपरक समाधान खोजेंगे प्रधानमंत्री

इन हालत में उन्हें लग रहा है कि जिस तरह योजना लागू की गई, वह प्रबंधन की विशाल असफलता है. यहां तक कि यह तो संगठित एवं कानूनी लूट-खसोट का मामला है। उनका इरादा किसी की भी खामियां बताने का नहीं है, ‘‘लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि देर से ही सही, प्रधानमंत्री एक व्यावहारिक, रचनात्मक और तथ्यपरक समाधान खोजने में हमारी मदद करेंगे ताकि इस देश के आम आदमी को हो रही परेशानियों से राहत मिल सके।
मनमोहन सिंह पूर्व प्रधानमंत्री

पूर्व प्रधानमंत्री ने ये बातें उच्च सदन में नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते लोगों को हो रही परेशानी के मुद्दे पर चर्चा को आगे बढाते हुए कहीं। यह चर्चा 16 नवंबर को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के पहले ही दिन आरंभ हुई थी। लेकिन फिर विपक्ष ने मांग उठाई कि चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री को सदन में आना चाहिए, चर्चा सुननी चाहिए और जवाब देना चाहिए। विपक्ष की इस मांग के चलते गतिरोध उत्पन्न हो गया और उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही।

आज प्रधानमंत्री के सदन में आने पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रश्नकाल चलाने के बजाय चर्चा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद हैं। सरकार ने आजाद का आग्रह स्वीकार कर लिया और सदन के नेता तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चर्चा तत्काल बहाल की जानी चाहिए और प्रधानमंत्री निश्चित रुप से इसमें हिस्सा लेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ सिंह ने कहा कि 8 नवंबर की रात को प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बाद से आम आदमी बुरी तरह परेशान हैं और उनकी तकलीफों की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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