नोटबंदी : नाबार्ड किसानों को बांटेगा 21,000 करोड़ रुपए, डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट से सर्विस चार्ज हटाया 

नोटबंदी : नाबार्ड किसानों को बांटेगा 21,000 करोड़ रुपए, डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट से सर्विस चार्ज हटाया आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास।

नई दिल्ली। नोटबंदी से किसानों को हो रही परेशानी से राहत देते हुए आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कृषि संबंधी ऋणों की मदद के लिए नाबार्ड ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए विशेष 21000 करोड़ रुपए की सीमा की अनुमति दी।

सरकार के 500 और 1,000 रुपए के नोट चलन से वापस ले लिए जाने के बाद किसानों के पास नकदी की भारी तंगी पैदा हो गई। इससे रबी मौसम की बुवाई से ठीक पहले किसान बीज और खाद जैसी जरूरी चीजें नहीं खरीद पा रहे हैं।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि नाबार्ड इस धन को किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि सहकारी बैंकों को उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘चालू रबी मौसम में कृषि कार्यों और विशेषतौर से किसानों के फायदे के लिए नाबार्ड ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को 21,000 करोड़ रुपए वितरित किए जाने की सीमा तय की है।''

नोटबंदी के बाद उपजे माहौल में रबी मौसम की बुवाई को लेकर बढ़ने चिंताएं

उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को सहकारी संस्थानों से ही फसल ऋण मिलता है। नोटबंदी के सरकार के फैसले के बाद किसानों के पास नकदी की तंगी पैदा हो गई और उन्हें रबी मौसम की बुवाई में परेशानी आ रही थी। पिछले दो साल के सूखे के बाद इस बार मानसून सामान्य रहने से बेहतर कृषि उत्पादन की उम्मीद बंधी है, लेकिन नोटबंदी के बाद उपजे माहौल में रबी मौसम की बुवाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी।

सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि सरकार ने रिजर्व बैंक, आम बैंकों, नाबार्ड को सहकारी बैंकों को नकदी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को ऋण और एक निश्चित मात्रा में नकदी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि सहकारी बैंकों के जरिए किसानों को पैसा दिया जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कल ही नाबार्ड को जिला सहकारी बैंकों को फसल ऋण के लिए 23,000 करोड़ रुपए जारी करने की अनुमति दे दी थी। यह निर्णय किसानों को ऋण उपलब्ध कराने में मदद करेगा। दास ने कहा कि कल कृषि ऋण में से संस्थागत ऋण के जरिए छोटे और सीमांत किसानों की 40 प्रतिशत से ज्यादा जरुरतों को पूरा किया जाता है।

दास ने कहा, ‘‘किसानों को नकद में ऋण प्राप्त हो इसके लिए सरकार ने नाबार्ड, रिजर्व बैंक और बैंकों को नकद में धन उपलब्ध कराने की सलाह दी है।'' बैंकों से कहा गया है कि वह जिला सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को काफी मात्रा में नकद उपलब्ध कराएं। इन्हीं बैंकों से कई किसानों को फसली ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट से सर्विस चार्ज हटाया

नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने डेबिट कार्डों के उपयोग पर लिए जाने वाले लेन-देन शुल्क से 31 दिसंबर तक छूट की घोषणा की है। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक और कुछ निजी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले सभी तरह के भुगतान पर लेन-देन शुल्क माफ करने पर राजी हो गए हैं।

यह निर्णय 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को बंद करने के बाद की स्थिति की समीक्षा के बाद किया गया है, इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, कुछ निजी बैंक एवं कुछ सेवाप्रदाताओं (स्विचिंग सेवा देने वालों) ने 31 दिसंबर तक डेबिट कार्ड के उपयोग पर सेवा शुल्क नहीं लेने पर सहमति जताई है।’’ वर्तमान में रुपे डेबिट कार्ड ने पहले ही स्विचिंग शुल्क से छूट दी हुई है, अन्य डेबिट कार्ड कंपनियां जो अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क का संचालन करती हैं जैसे कि मास्टरकार्ड और वीजा मौजूदा समय में लेन-देन शुल्क लेती हैं।
शक्तिकांत दास आर्थिक मामलों के सचिव

अभी इस लेन-देन शुल्क का भार ग्राहक को उठाना पडता है। सरकार को किए जाने वाले भुगतान पर इसे आम भाषा में व्यापारिक छूट दर (एमडीआर) के नाम से जाना जाता है। दास ने कहा, ‘‘डेबिट कार्डों पर लगने वाले एमडीआर शुल्क, बैंकों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क और स्विचिंग शुल्क सभी को समाप्त कर दिया गया है. इस प्रकार डेबिट कार्डोंं के उपयोग पर अब कोई शुल्क नहीं होगा।''

आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा, ‘‘मैं इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के कुछ बैंकों का धन्यवाद करना चाहूंगा जो इस पर पहले ही सहमत हो चुके हैं. अन्य के इस पर सहमत होने की उम्मीद है और वे अपने परिपत्र स्वयं जारी करेंगे।'' उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे हमारी अर्थव्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा डिजिटल लेन-देन को सुनिश्चित करना है साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि अधिक संख्या में लोग डिजिटल भुगतान का रुख करें।

रिजर्व बैंक ने 2012 में डेबिट कार्डों के लिए एमडीआर की सीमा तय कर दी थी। यह सीमा दो हजार रुपए तक की राशि के लेन-देन पर मूल्य का 0.75 प्रतिशत और उससे अधिक के लेनदेन पर एक प्रतिशत थी। हालांकि, क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर रिजर्व बैंक ने एमडीआर की कोई सीमा तय नहीं की है।

देश में नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए और कार्ड से लेनदेन का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए रिजर्व बैंक ने मार्च में एक परिपत्र जारी कर लोगों से राय मांगी थी। अक्तूबर 2015 तक देश में 61.5 करोड़ डेबिट कार्ड धारक और 2.3 करोड़ क्रेडिट कार्डधारक थे।

सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि टोल प्लाजा पर भुगतान अब डिजिटल किया जाएगा। सचिव शक्तिकांत दास ने बताया कि सभी सरकारी संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी एजेंसियों को सलाह दी गई है कि वेतन देने और अन्य खर्चों के लिए डिजिटल भुगतान का उपयोग करें।

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