मनमोहन पर प्रधानमंत्री की ‘रेनकोट’ टिप्पणी पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, संसद में कांग्रेस करेगी पीएम का बहिष्कार

मनमोहन पर प्रधानमंत्री की ‘रेनकोट’ टिप्पणी पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, संसद में कांग्रेस करेगी पीएम का बहिष्कारबजट सत्र के बाद भाजपा के वित्त मंत्री अरुण जेटली व कांग्रेस के आनन्द शर्मा एक दूसरे से हाथ मिलाते हुए।

नई दिल्ली (भाषा)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर की गई ‘रेनकोट' टिप्पणी को लेकर आज कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बहस हुई। मुख्य विपक्षी दल ने दूसरे दलों के साथ मिलकर मनमोहन पर ‘‘अपमानजनक'' टिप्पणी के लिए प्रधानमंत्री से माफी मांगने का दबाव बनाया।

भाजपा ने कहा कि कांग्र्रेस को दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है, पार्टी ने मांग की कि विपक्षी दल प्रधानमंत्री पर निशाना साधने के लिए संसद और मोदी से माफी मांगे।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल गांधी को वह बयान याद दिलाया जो उनकी मां ने मोदी के खिलाफ उपयोग किया था। उनका इशारा सोनिया गांधी द्वारा मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री रहते उन्हें ‘मौत का सौदागर' बताने वाले बयान की तरफ था।

कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने दो बार राज्यसभा स्थगन का दबाव बनाते हुए मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति ‘‘अपमानजनक'' टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग की। वहीं कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने पद की गरिमा कम की है।

कांग्रेस, माकपा और जद यू ने मोदी द्वारा राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने के दौरान की गई कल की टिप्पणी को उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘‘अपमानजनक'' भाषा का प्रयोग किया।

मोदी ने कहा था कि हर किसी को मनमोहन सिंह से ‘‘रेनकोट पहनकर नहाने'' की कला सीखनी चाहिए क्योंकि उनके कार्यकाल में कई घोटाले होने के बावजूद उन पर कोई दाग नहीं लगा है।

वह राजनीतिक बहस को काफी नीचे ले गए हैं... वह गाली गलौच की भाषा बोल रहे थे... हम उनका विरोध करेंगे।
आनंद शर्मा कांग्रेस

उपसभापति पी जे कूरियन ने कहा कि मोदी के बयान से जुड़ा मुद्दा बंद हो चुका अध्याय है जहां तक आसन की बात है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसी चर्चा फिर से नहीं शुरू करवाना चाहता जो बंद हो चुकी है... (अपनी चिंताओं) को उठाने के कई दूसरे रास्ते हैं।''

कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह ने मनमोहन सिंह और अन्य पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ मोदी की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति की और मांग की कि उन्हें कार्यवाही से हटाया जाए। कांग्रेस के सदस्य ‘‘शर्म करो, शर्म करो'' के नारे लगाते देखे गए।

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम।

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने 2017-18 के आम बजट की चर्चा शुरू करते हुए अपने पूर्ववर्ती पर हमले के लिए मोदी द्वारा प्रयोग किए गए शब्दों को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें याद रखना चाहिए कि जिस कुर्सी पर वह बैठे हैं उस पर पंडित जवाहर लाल नेहरु और यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी बैठे थे और इसलिए उन्हें सही भाषा का प्रयोग करना चाहिए।

राहुल ने चुनाव वाले राज्य उत्तराखंड के अलमोडा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का कार्यालय साधारण नहीं होता। इससे काफी सम्मान जुड़ा होता है. इसलिए इस तरीके से अपने पूर्ववर्ती को निशाना बनाकर प्रधानमंत्री ने अपने पद की गरिमा कम की है।''

एम वेंकैया नायडू।

नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस को संसद बाधित करने और प्रधानमंत्री के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग करने के लिए माफी मांगनी चाहिए जो उन्होंने ‘‘न केवल अभी बल्कि पहले भी'' की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने कई बार मोदी को ‘‘भद्दे और स्तरहीन शब्दों'' में संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘‘वे दूसरों को प्रवचन नहीं दें।''

नायडू ने कहा, ‘‘उन्होंने (विपक्ष) प्रधानमंत्री को ‘हिटलर', ‘मुसोलिनी', गद्दाफी' कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ निरर्थक टिप्पणियां कीं। यह शर्मनाक है. वे वास्तविकता नहीं समझ पा रहे, जो मुद्दे नहीं हैं उन्हें मुद्दा बना रहे हैं. प्रधानमंत्री माफी क्यों मांगें?''

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया खासकर उसके शीर्ष नेताओं राहुल और सोनिया गांधी पर। उन्होंने कहा कि यह पुरानी राजनीतिक पार्टी नहीं है जो विचारधाराओं पर चल रही है बल्कि ‘‘परिवार के लिए प्रतिबद्ध पार्टी है।''

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री का बहिष्कार करेंगे। हम उनकी बातें नहीं सुनेंगे और साथ ही प्रधानमंत्री पद की गरिमा पर प्रहार भी नहीं करेंगे। इसके साथ ही हम अपना विरोध जारी रखेंगे, हम जानते हैं कि वह जिद्दी व्यक्ति हैं।''

यह पूछने पर कि क्या बहिष्कार इसी सत्र तक रहेगा, उन्होंने कहा कि यह लंबा सत्र है और पार्टी दूसरे विपक्षी दलों के साथ समन्वय करेगी और दो सत्रों के बीच के समय में बैठक होगी। पार्टी आगे भी अपना बहिष्कार जारी रखेगी।

First Published: 2017-02-09 22:29:36.0

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