राम मंदिर मसले पर सभी संबंधित पक्ष साथ बैठें और बातचीत से मसले को सुलझाएं : सुप्रीम कोर्ट

राम मंदिर मसले पर सभी संबंधित पक्ष साथ बैठें और बातचीत से मसले को सुलझाएं : सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट।

नई दिल्ली (भाषा)। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि दोनों पक्ष मिलकर राम मंदिर मामले को बातचीत से सुलझाएं, ये धर्म व आस्था से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को न्यायिक तरीके से सुलझाने के बजाय इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना बेहतर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अयोध्या विवाद सुलझाने के मामले में उच्चतम न्यायालय के सुझाव का स्वागत किया।

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर, न्यायमूर्ति डी.वाय. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की सदस्यता वाली पीठ ने यह बात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की इस अपील की कि शीर्ष अदालत इस मामले में 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक अलग पीठ गठित करे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच अयोध्या भूमि का बंटवारा कर दिया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सर्वसम्मति पर पहुंचने के लिए सभी संबंधित पक्ष साथ बैठें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा है और यह बेहतर होगा कि इस मुद्दे को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी से संबंधित पक्षों से सलाह करने और इस संदर्भ में लिए गए फैसले के बारे में कोर्ट को 31 मार्च को सूचित करने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष उनकी मध्यस्थता चाहते हैं तो वह इस काम के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को इस मुद्दे को सुलझाने के नए प्रयास करने के लिए मध्यस्थ चुनने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरुरत पड़ने पर मामले के निपटान के लिए न्यायालय द्वारा प्रधान मध्यस्थ चुना जा सकता है।

न्यायमूर्ति केहर ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से कहा, "आप किसी को भी चुन सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि मैं मध्यस्थता करूं तो मैं मामले की (न्यायिक पहलू से) सुनवाई नहीं करूंगा। या अगर आप चाहें तो मेरे भाई (न्यायमूर्ति कौल) को चुन सकते हैं। विवाद हैं। आप सभी साथ बैठकर फैसला करें।"

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