गंगा में जहर घोलने वाले कारखानों को अल्टीमेटम

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गाँव कनेक्शन संवाददाता

उन्नाव। माघ मेले के मद्देनजर दूषित पानी गंगा में बहाने वाले आद्योगिक कारखानों पर जिला प्रशासन की नजरें टेढ़ी हो गयी हैं। जनवरी व फरवरी माह में गंगा में दूषित पानी न पहुंचने पाए इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में बने ऐसे कारखानों को उत्पादन बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

इसके साथ ही इन कारखानों पर निगरानी रखने के लिए उप जिलाधिकारी सदर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गयी है। जिलाधिकारी ने निर्देश जारी किए हैं कि इस दौरान यदि किसी कारखाने में उत्पादन होता पाया गया तो उक्त कारखाने के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माघ मेले में लाखों श्रृद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं। श्रद्धालुओं को प्रदूषणमुक्त स्वच्छ गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने बीती 17 दिसम्बर को निर्देश जारी किए थे।

इसमें औद्योगिक क्षेत्र एक एवं औद्योगिक क्षेत्र दो बंथर व मगरवारा की औद्योगिक ईकाइयों को शून्य उत्प्रवाह बनाए रखने के लिए जनवरी व फरवरी माह में उत्पादन प्रक्रिया बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों का अनुपालन कराने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। इसमें उप जिला मजिस्ट्रेट, सहायक पर्यावरण अभियंता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंकज यादव, सहायक पर्यावरण अभियंता प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विकास मिश्र को शामिल किया गया है।

समिति को आवंटित क्षेत्र की औद्योगिक ईकाइयों का संयुक्त रूप से निरीक्षण कर प्रत्येक सप्ताह निरीक्षण आख्या क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराए ताकि बोर्ड के सदस्य सचिव साप्ताहिक रिपोर्ट भेजी जा सकें। डीएम सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि निरीक्षण के दौरान यदि किसी उद्योग अशुद्ध उत्प्रवाह गंगा में प्रवाहित होता पाया जाए तो उक्त ईकाई को तुरंत बंद कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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