नोटबंदी पर प्रधानमंत्री का सदन में बहस में हिस्सा नहीं लेना संसद का अपमान: एनके प्रेमचंद्रन

नोटबंदी पर प्रधानमंत्री का सदन में बहस में हिस्सा नहीं लेना संसद का अपमान: एनके प्रेमचंद्रनप्रेमचंद्रन ने कहा कि BJP नीत सरकार के पास लोकसभा में भारी बहुमत है तो वे मत विभाजन से डरते क्यों हैं। वे आसानी से इसे परास्त कर सकते हैं।

नई दिल्ली (भाषा)। नोटबंदी पर सदन से बाहर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कोल्लम से आरएसपी सांसद एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह संसद का अपमान है और प्रधनामंत्री को संसद में आना चाहिए, बहस में भाग लेना चाहिए और विपक्ष की चिंताओं पर जवाब देना चाहिए।

रेवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) सांसद एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि उन्हें (प्रधानमंत्री) संसद में आना चाहिए और बहस में भाग लेना चाहिए एवं नोटबंदी पर विपक्ष की चिंताओं पर जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘वे (मोदी) संसद में नहीं आ रहे हैं और बाहर बोल रहे हैं। यह संसद का अपमान है।'' उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मतविभाजन के प्रावधान वाले नियम 56 के तहत सदन में चर्चा हो। हालांकि नियम 184 के तहत भी चर्चा करायी जा सकती है जिसमें मतविभाजन का प्रावधान है। लेकिन इन मुद्दों पर सरकार को विपक्ष के समक्ष प्रस्ताव लेकर आना चाहिए।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि BJP नीत सरकार के पास लोकसभा में भारी बहुमत है तो वे मत विभाजन से डरते क्यों हैं। वे आसानी से इसे परास्त कर सकते हैं। ‘‘लेकिन वे (सत्तारुढ़ पार्टी) अपने घटकों और सहयोगी दलों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उनके मन में शिवसेना, अन्नाद्रमुक जैसे दलों को लेकर संशय है। इसलिए वे डरे हुए हैं।'' नरेन्द्र मोदी एप्प पर सर्वेक्षण में 93 प्रतिशत लोगों द्वारा नोटबंदी का समर्थन करने के सरकार के दावे पर तीखा प्रहार करते हुए केरल के कोल्लम से आरएसपी सांसद ने कहा कि वे एक एप्प सर्वेक्षण का दावा कर रहे हैं जबकि हमारा मानना है कि इसका सही मंच संसद है जहां मतविभाजन के जरिये यह साफ हो जायेगा कि नोटबंदी को कितना समर्थन प्राप्त है और कौन कौन लोग इसके पक्ष में हैं।

प्रेमचंद्रन ने कहा, ‘‘वे कहते हैं कि 93 प्रतिशत लोग समर्थन कर रहे हैं, तो फिर नियम 56 के तहत चर्चा करने से भाग क्यों रहे हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारुढ़ पार्टी और सरकार संसद में नोटबंदी पर चर्चा ही नहीं करना चाहती हैं इस फैसले के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इसके कारण बैंकों और एटीएम की कतारों में 70 लोगों की मौत हो चुकी है। एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि हम आम लोगों, गरीबों, छात्रों, महिलाओं, किसानों की परेशानियों और तकलीफों की बात करते हैं। प्रधानमंत्री इस तरह के गलत आरोप लगाना बंद करें और संसद में आकर बोलें।

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