इस बार अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरु होना दिखावा ही साबित होगा

इस बार अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरु होना दिखावा ही साबित होगाअप्रैल की पहली तारीख से शुरु होना है नया शैक्षिक सत्र।

लखनऊ। सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए अप्रैल की पहली तारीख को शैक्षिक सत्र की शुरुआत मात्र दिखावा होगी। एक तो पहले से ही अप्रैल में स्कूलों को खोला जाना एक औपचारिकता के तौर पर था, उस पर इस बार फरवरी में चुनाव और मार्च में चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अप्रैल में शैक्षिक सत्र की शुरुआत दिखावा साबित होगी।

बोर्ड परीक्षाएं जल्दी संचालित करवा कर इसका परिणाम घोषित किये जाने के चलते शैक्षिक सत्र की शुरुआत वर्ष 2015 में की गयी थी। जिसके चलते शैक्षिक सत्र 1 जुलाई की अपेक्षा 1 अप्रैल को शुरू किया जाने लगा। इसके पीछे उद्देश्य रहा कि मार्च के शुरू या मध्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जून मध्य या अंत तक घोषित होता था। इसके कारण उन विद्यार्थियों जिनको किसी अन्य कोर्स की पढ़ाई करनी होती थी, वह परिणाम घोषित न हो पाने के कारण परेशानी महसूस करते थे।

इस बार शैक्षिक सत्र अप्रैल में शुरू होगा या नहीं, इस विषय में मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि इसकी जानकारी तो शासनादेश जारी होने के बाद ही हो सकेगी।
महेन्द्र सिंह राणा, सहायक निदेशक

माध्यमिक शिक्षा में शैक्षिक सत्र की शुरुआत अप्रैल में किये जाने के बाद बेसिक शिक्षा में भी इसको लागू कर दिया गया था। लेकिन अप्रैल महीने में शैक्षिक सत्र की शुरुआत मात्र दिखावा रही। कहीं स्कूल बंद रहे तो कहीं चपरासी के सहारे स्कूल खोलने की औपचारिकता निभायी जाती रही थी। एक ओर जहां शिक्षक स्कूलों से नदारद थे तो वहीं बच्चों के पास भी स्कूल न आने के सौ बहाने थे। शैक्षिक सत्र के शुरुआती महीने अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर मात्र औपचारिकता ही निभायी गयी थी। इस बार फरवरी में चुनाव और मार्च में चुनाव के नतीजे घोषित होंगे और इसके बाद अप्रैल से शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू किया जाना पिछले दो वर्षों के मुकाबले शिक्षा और भी बड़ा दिखावा ही साबित होगा।

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री व प्रवक्ता डा. महेन्द्र नाथ राय कहते हैं कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अधिकतर बच्चे ग्रामीण परिवेश के ही होते हैं। अप्रैल के महीने में खेती-किसानी के काम के चलते अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं आ पाते हैं। जिसके कारण उनकी पढ़ाई नहीं हो पाती। बच्चों के स्कूल न आ पाने के कारण कुछ शिक्षक ऐसे होते हैं जो स्कूल आने में कतराते हैं।

ऐसे में जब चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगायी जायेगी, उसके कुछ समय बाद ही अप्रैल में शिक्षा का नया सत्र शुरू हो जायेगा। ऐसे में न तो शिक्षक ही स्कूल पहुंच सकेंगे और न ही बच्चे। ऐसे में अप्रैल में शैक्षिक सत्र शुरू करना मुश्किल दिखाई पड़ता है। वहीं, संयोजक बेसिक शिक्षक संघ एवं आदर्श जनता पूर्व माध्यमिक विद्यालय, मुजफ्फरनगर के महतार सिंह कहते हैं कि इस बार तो शैक्षिक सत्र अप्रैल में शुरू करने के मायने समझ नहीं आ रहे।

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