गोवा में शक्ति परीक्षण में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जीते, सरकार के पक्ष में 22 वोट पड़े

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   16 March 2017 3:21 PM GMT

गोवा में शक्ति परीक्षण में  मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जीते, सरकार के पक्ष में 22 वोट पड़ेगोवा विधानसभा में गुरुवार को हुआ शक्ति परीक्षण।

पणजी (आईएएनएस)। गोवा विधानसभा में गुरुवार को हुए शक्ति परीक्षण में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने जीत हासिल कर ली। पर्रिकर ने मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर सरकार के पक्ष में 22 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में केवल 16 वोट पड़े। इस दौरान पार्टी का एक विधायक इस बेहद अहम शक्ति परीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहा।

मनोहर पर्रिकर

गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने पर्रिकर को रविवार को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता चंद्रकांत कावलेकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस तटीय राज्य की नई सरकार से गुरुवार को ही बहुमत साबित करने को कहा था।

देश-दुनिया से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

गोवा विधानसभा 2017 की 40 सीटों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हालांकि 13 सीटें ही मिली थीं और कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 21 विधायकों के समर्थन का जादुई आंकड़ा पूरा करने में कांग्रेस पीछे रह गई और यहां भाजपा ने बाजी मार ली।

पार्टी को महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) और गोवा फॉरवर्ड के तीन-तीन विधायकों तथा तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल हुआ। कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त और संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शक्ति परीक्षण करवाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। पर्रिकर ने इस हफ्ते की शुरुआत में रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और गत 14 मार्च को उन्हें तथा अन्य नौ विधायकों को राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने शपथ ग्रहण करवाई थी।

विश्वास मत में कांग्रेस का एक विधायक रहा अनुपस्थित

विश्वास मत में विपक्ष में कांग्रेस के 16 विधायक मौजूद थे जबकि नवनिर्वाचित सदस्य विश्वजीत राणे मतदान के वक्त गैरमौजूद रहे। अस्थायी अध्यक्ष और भाजपा सदस्य सिद्धार्थ कुनकोलिनकर ने विश्वास मत करवाने का आदेश दिया था जिसे पर्रिकर सरकार ने स्पष्ट विभाजन के साथ पास कर लिया।

पर्रिकर के नाम पर भाजपा जीएफपी, एमजीपी और निर्दलीयों का समर्थन जुटाने में सफल रही। जब पर्रिकर ने विश्वास मत का प्रस्ताव रखा तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापसिंह राणे ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया लेकिन अध्यक्ष ने इसकी इजाजत नहीं दी और मतदान प्रक्रिया को जारी रखा।

विश्वास मत से पहले सभी 40 विधायकों ने शपथ ली। इसके बाद, 22 मार्च को अध्यक्ष चुना जाएगा और 23 मार्च को राज्यपाल का अभिभाषण होगा। 24 मार्च को राज्य का बजट पेश होगा।

चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी जबकि भाजपा ने त्वरित कदम उठाते हुए निर्दलीयों तथा क्षेत्रीय संगठनों का समर्थन जुटा लिया।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top